क्या कन्या होकर जुर्म किया है??

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क्या कन्या होकर जुर्म किया है??

जाने क्यों मेरा परिवार, मुझे मारना चाहता है
क्यों निर्दोष की हत्या पर, दिल इनका हर्ष मनाता है
पहले भी मेरी बहनें, पेट में माँ के मारी गयी
हमको बचाते माँ बेचारी, कदम-कदम पर ताड़ी गयी
माँ दुर्गा के अंश का बोलो, क्यों इतना ये खून बहा है
मुझको कोई इतना बता दो क्या कन्या होकर जुर्म किया है ??
माँ ने मुझको बचा लिया तो, भेदभाव तुमने है किया
लोगों की बातों में आकर, मुझको तो अनपढ़ ही रखा
मेरे भाई की खुशी के खातिर, खुशी को मेरी मार दिया
फिर छोटी सी उमर में जल्दी, मेरा कन्यादान किया
कहके पराया अपने घर से, तुमने मुझको विदा किया है
मुझको कोई इतना बता दो क्या कन्या होकर जुर्म किया है ??
मैंने नये परिवेश में, सबके संग खुद को ढाला
पर दहेज के लोभ में सबने ,लगभग मुझको मार ही डाला
उमर थी छोटी फिर भी मैंने, उनका आगे वंश बढ़ाया
अनपढ़ थी पर फिर भी मैंने, अंश को अपने खूब पढ़ाया
उसी अंश ने करके शादी, मुझको घर से फेंक दिया है
मुझको कोई इतना बता दो क्या कन्या होकर जुर्म किया है ??
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