राखी का नेह

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राखी का नेह

By |2017-07-17T14:54:44+00:00July 17th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

 

बचपन की यादों को लेकर,रक्षाबंधन आया है !

कर पर धागा,मस्तक रोली,चंदन-वंदन लाया है !!

प्रीति थिरकती,नेह बिखरता,

दिल में पावनता पलती

प्यार जताने,वचन निभाने,

को पावन ज्योति जलती

संस्कार के आंचल में अब,नव अभिनंदन आया है !

कर पर धागा,मस्तक रोली,चंदन-वंदन लाया है !!

बीता कल है आज जवाँ फिर,

कहीं खिला भोलापन है

हर दिल खुश है,हर्ष चहकता,

सभी जगह अपनापन है

बहन-भाई का रिश्ता कोमल,मीठी अनबन लाया है !

कर पर धागा,मस्तक रोली,चंदन-वंदन लाया है !!

वेद-पुराणों में महिमा है,

इतिहासों में गाथा है

मान और स्तुति में देखो,

झुका सभी का माथा है

भावों के सागर में देखो,उजला सा इक दर्पन है !

कर पर धागा,मस्तक रोली,चंदन-वंदन लाया है !!

– प्रो.शरद नारायण खरे

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