जिस जगह से तुम रूठ कर गए थे

जिस जगह से तुम रूठ कर गए थे

By |2018-01-20T17:06:13+00:00October 25th, 2015|Categories: अन्य, कविता|0 Comments

जिस जगह से तुम रूठ कर गए थे
हमारे पैर रोज़ खुद-ब-खुद उसी जगह हमें ले जाते हैं

यक़ीनन तुम एक बार तो उसी जगह आओगे
ये देखने को, किस हाल में हम जिंदा हैं

– संजीव कुमार बर्मन

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