यह कैसा दौर है नया ,सत्य स्वयं ही राह से भटक गया इंसान इंसानियत को छोड़ कर भ्रष्टाचार रूपी जहर में लिपट गया |
आज के दौर में भ्रष्टाचार भारत के विकास में सबसे बड़ी बाधा के रूप में सामने आया है|
कहते हैं- भ्रष्ट है जो आचार वह है भ्रष्टाचार |भ्रष्टाचार एक घुन की भांति भारत के विकास में बाधा बनता जा रहा है| भ्रष्टाचार के कारण ही कार्यालय,दफ्तरो व अन्य कार्यक्षेत्रों में चोर बाजारी, रिश्वतखोरी आदि अनैतिक कृत्य पनपते हैं|दुकानों में मिलावटी सामान बेचना, धर्म का सहारा लेकर लोगों को पथभ्रमित करना, दोषी तथा अपराधी तत्वों को रिश्वत ले कर मुक्त कर देना अथवा रिश्वत के आधार पर विभागों में भर्ती होना आदि सभी भ्रष्टाचार के प्रारूप हैं|देश के 100 में से 80 फ़ीसदी लोग इस तरह के कार्य करने की फिराक में रहते हैं|खेद का विषय तो यह है कि स्वयं सरकारी मंत्री करोड़ों अरबों के घोटाले करते नजर आते हैं|आधुनिक युग में व्यक्ति के प्रत्येक कार्य के पीछे स्वार्थ प्रमुख हो गया है|समाज में नैतिकता, अराजकता, स्वार्थपरकता एवं भ्रष्टाचार का बोलबाला हो गया है| कभी समाज सेवा के लिए जाना जाने वाला हमारा भारत देश आज भ्रष्टाचार की जननी बन चुका है|इसका परिणाम यह हो रहा है कि भारतीय संस्कृति तथा उसका पवित्र एवं नैतिक स्वरूप धुंधला होता जा रहा है| नौसीखिए नेता सभी प्रकार की मान-मर्यादाएँ भूलकर भ्रष्टाचार रूपी घुन से भारत की जड़ों को खोखला कर रहे हैं| हर घोटाले गोरखधंधे की पगडंडी अंततः राजनेताओं तक जाती दिखाई देती है|क्योंकि- इंसान कम बचे हैं नियत सबकी हो गई है स्पष्ट| शिकायत किससे करें जब पूरा तंत्र ही हो गया है भ्रष्ट|मेरी इस बात का समर्थन आप सभी लोग करेंगे कि आज हर व्यक्ति नैतिक और अनैतिक तरीकों से धन कमाने में लगा हुआ है| जिसके कारण भ्रष्टाचार रूपी कीड़ा पनपता जा रहा है और भारत के विकास में बाधक बनता जा रहा है|आज मनुष्य की इच्छाएँ सुरसा के मुख की भांति बढ़ती जा रही हैं जिनकी पूर्ति हेतु कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार करने से नहीं कतराता उसे न किसी का भय है और न ही किसी की चिंता| धन कमाने के लिए वह हर प्रकार की सिर्फ भ्रष्ट नीतियाँ ही अपना रहा है|आज की स्थिति यह है कि उच्च अधिकारी से लेकर निम्न स्तर तक सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और जब तक भ्रष्टाचार से मिलने वाली आय का भारतवासी स्वयं स्वागत करते रहेंगे तब तक भ्रष्टाचार भारत के विकास में इसी तरह बाधा बनकर अपनी टांगे पसारता रहेगा|आज सभी भारतीय नागरिकों को इसे दूर करने हेतु कृतसंकल्प होने की आवश्यकता है| भ्रष्टाचार के दोषी व्यक्तियों का पूर्णरूपेण सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए ताकि ऐसे लोगों के मनोबल को खंडित किया जा सके जिससे वह इसकी पुनरावृत्ति न कर सके| भ्रष्टाचार के विरोध में राष्ट्रीय जन-जागृति को अपनी आवाज भ्रष्टाचार के विरूध बुलंद करनी होगी| यदि हमें देश को प्रगति पथ पर ले जाना है तो हमें अपने लोभ पर विराम चिह्न लगाना होगा|भारत की सभ्यता और संस्कृति को यदि चिरकाल तक जीवित रखना है तो हमें अपने व्यक्तित्व में सुधार लाना होगा तभी हम देश के अस्तित्व पर छाए धुंधलेपन को मिटा पाएँगे और संपूर्ण विश्व में सोने की चिड़िया कहलाने वाले अपने देश भारत को प्रगति के पथ पर ले जाकर उसका मान सम्मान और भी अधिक बढ़ा कर उसे उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचा पाएँगे|
अपने सपने होंगे पूरे ,
दुश्मन के साकार नहीं ,
अमन चैन के दिन होंगे ,
अब होगा भ्रष्टाचार नहीं |
अब होगा भ्रष्टाचार नहीं ||

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