आशिकी

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आशिकी

By |2017-07-22T08:49:50+00:00July 22nd, 2017|Categories: आलोचना|0 Comments
मेरी आशिकी में कसर रह गई हैं

कमी है दिल में एक कसक रह गई

हसीना मेरी बाहों में आई जुम्मे जुम्मे

दिदार ए यार हुआ जुम्मे जुम्मे

गुफ्तगू यार से अधूरी बाकी है

इन्तजार की कहानी अनकही रही

मिलन की घड़ी कम पड़ रही है

मेरी जिंदगी मेरी मंशा से नहीं गुजरी

सिक्के की उलझन मैं उलझा ही रहा

गुमराह हुआ मयकदे में फसाद में

खुदा दिवानो पर एक मेहरबानी कर दें

एक ओर जवानी तोहफे में दे दें कोई मेरे लिये अमृत ले आओ

एक जिंदगी है कम आशिकी के लिये

हकीम बुढापे को जवानी में बदल दे

मुंह मांगा ईनाम हम से ले वादा

मेरी आशिकी में कसर रह गई है कसर हैं दिल में एक कसक बाकी

 

 

 

 

 

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