सांसों के कारोबार में झोंक दिया

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सांसों के कारोबार में झोंक दिया

By |2017-07-22T08:29:59+00:00July 22nd, 2017|Categories: आलोचना|0 Comments

पंखुड़ी से चोटिल थे कांटो पर चला दिया

सांसों के कारोबार में हमको झोंक दिया

न प्रशिक्षण न कोई हिदायते दी यारो

सांसों के कारोबार में हमको झोंक दिया

न मां की चीत्कार सुनी न शिशु का रूदन

सांसों के कारोबार में हमको झोंक दिया

कुछ कर गुजरने की तमन्ना नहीं थी दिल मैं

पेट की आग ने काम मैं झोंक दिया

रोज सजती थी महफिल रोज खनकते थे प्याले

किसी काम के नहीं हो जमाना कह रहा था

हुस्न की एक नजर ने कहानी बदल डाली

इश्क ने बावरे दिवााने को सयाना बना दिया

मुफलिसी जिस्म को मजबूती देती रही

भार होगा कम कभी किसी रोज यार

इसी आस में ज़िन्दगी गुजार गई हाय

आज कल मैं सांसों कारोबार खत्म हुआ

हजारों हसरतें थी शमशान में जिंदा जल ग इ

पंखुड़ी से चोटिल थे काटो पर चला दिया

सांसों के कारोबार में हमको झोंक दिया

 

 

 

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