परिवार

बेहिचक बेमिसाल रहती थी,

मेरी बीमार बूढ़ी माँ

मुझको, अपनी गुदड़ी कालाल कहती थी |

राग का राशिफल  बनाती है,

मेरी सहधर्मिणी जीता मुझको,

अपना हर दावं हार जाती है |

(द्धुतिमती ) वर्तिका प्रतीत हुई,

पावं छूने झुकीजो पुत्रवधू, इक

विनयपत्रिका प्रतीत हुई |

नन्हें हाथों से सर दबाती है- मेरी बेटी

माँ बनकर, वृद्ध नाना के पास आती है |

 

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