सीता के राम

त्रेता युग के राम तुम हो
राम तेरी सीता भी मैं हूँ
मैंने क्यूँ बनवास है पाया
पूरा जीवन दूर बिताया
राम ये माना मैंने भी है
सीता के बिन तू भी नहीं है
फिर क्यों तुने मंझधार में छोड़ा
रिषियों के साथ में रहकर
मैंने जीवन अपना बिताया
कैसे तुम बिन गुजरी रातें
कैसे गुजारे दिन है हमने
तुम बताओ राम प्रभु जी
कैसे जीए तुम भी हो हम बिन
क्या बतलाओगे सीता को
त्रेता युग के राम तुम हो
राम मैं हूँ तेरी सीता

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