मैं लिखने बैठा जिंदगी की बही

क्या खोया – क्या पाया, क्या ग़लत – क्या सही
मैं लिखने बैठा जिंदगी की बही

कुछ खोया, कुछ पाया
पर कभी किसी का दिल न दुखाया

कभी लाभ, कभी हानि
कभी दिमाग़ की तो कभी दिल की मानी

बहुत से आँसू भी पिए
पर हर पल से खुशी-खुशी जिए

लेखक –  संजीव कुमार बर्मन

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