किसी के आश्वासन पर पूरा भरोसा मत कर दोस्त

वो जो मद्द के आश्वासन बाँटते फिरते थे
उन्हे दीवालिया होते देखा हैं

वो मजबूत दीवार जो सहारे दे सकती थी
उन्हे हवा से गिरते देखा हैं

किसी के आश्वासन पर पूरा भरोसा मत कर दोस्त
बहुत सी कश्तियों को किनारे पर डूबते देखा हैं

लेखक – संजीव कुमार बर्मन

Rating: 1.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu