चंद सिक्कों से वो प्यारा हो गया ।
जी वही  सबका दुलारा  हो गया ।।

काटती है उसको अब  ये सरज़मीं ।
घर भी देखो  नागँवारा हो गया ।।

भूल बैठा माँ बहन बच्चों  को भी ।
भूल बीवी  वो  कँवारा  हो गया ।।

साथ में  जिनके  कभी  खेला किये ।
दोस्तों से भी अब किनारा हो गया ।।

याद  उसको  हैं  नही फ़ाकाकशी ।
वो फ़लक का इक सितारा हो गया ।।

माँ पिता को अब वो क्यों पूछे भला ।
ज्ञान  का  वो  खुद पिटारा हो गया ।।

वक्त  की  वो  चाल भी समझे नही ।
काल  भी  देखों  हमारा  हो गया ।।

-पुष्प सैनी

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