आईना

आईना

By |2017-08-01T16:16:48+00:00July 19th, 2017|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

जब कोई नही
समझता हमे
तब वो
समझता है हमे
जब कोई निभाता
हमारा साथ
तब वो निभाता
हमारा साथ
जब कोई नही
सुनता हमे
तब वो
सुनता हमे
वो शख्स
हमे आईने
के सामने
खड़े होने
में नजर आता है
जो हमे हमसे
बेहतर जनता है
ए आईना तेरा
बहुत बहुत
शुक्रिया  मुझे
मुझसे मिलाने का

-गरिमा कांसकार

Comments

comments

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 1
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    1
    Share

About the Author:

Leave A Comment