इंटरनेट शब्द का हिंदी अनुवाद ‘अंतरजाल’ कहा जाता है लेकिन मूल अंग्रेजी शब्द ही व्यापक प्रचलन में है । इसे संक्षिप्त में ‘नेट’ भी कहाँ जाता है । जिसका अर्थ है ‘जाल’ । वास्तव में इंटरनेट एक जाल ही है, जिसके असंख्य धागे एक दुसरे से मिलकर एक विशाल और अत्यंत जटिल संरचना का निर्माण करते है । एक परिभाषा के अनुसार “अंतरजाल एक दुसरे से जुड़े हुए संगणको का एक विशाल विश्वव्यापी नेटवर्क या जाल है ।‘ इंटरनेट नेटवर्क की उत्पत्ति 1960 के दशक में संयुक्त राज्य संघीय सरकार द्वारा कम्प्यूटर नेटवर्क के माध्यम से मजबूत, संचार के निर्माण के लिए शुरू की गयी थी । जैसा की हम जानते है कि इंटरनेट आज के जमाने में बहुत ही जरूरी हो गया है । इंटरनेट का अर्थ है इंटरनेशनल नेटवर्क । यह दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है जो दुनिया के संगणक को वेब सर्वर और राउटर के माध्यम से आपस में जोड़ कर रखता है । राउटर वह उपकरण है जो एक संगणक से दुसरे संगणक को टीसीपी/ आइपी के जरिये कोई भी सुचना आदान – प्रदान करता है ।
भारत में इंटरनेट पर अंग्रेजी का वर्चस्व धीरे – धीरे ही सही, पर कम होते दिख रहा है और हिंदी का वर्चस्व अंग्रेजी की अपेक्षा अधिक होते देखा जा रहा है । हिंदी अब साइबर स्पेस में अपनी जगह बना रही है, वो भी अंग्रेजी से कही ज्यादा तेजी से । हिंदी भाषा के बाजार पर इंटरनेट की बड़ी कम्पनियां अपना कब्जा जमाने के लिए क्या – क्या कर रही है । ये गूगल के आंकड़े बताते हैं कि भारत में इंटरनेट पर हिंदी का इस्तेमाल वार्षिक 94 फीसदी की दर से बढ़ रही है । देश के हर पाँच व्यक्तियों में से एक भारतीय हिंदी में सर्च करना पसंद करता है । इसके मुकाबले देश में इंटरनेट पर अंग्रेजी सिर्फ 14% की दर से बढ़ रही है । इंटरनेट की बड़ी कम्पनियां इस बात को भली – भांति जानती है कि डिजिटल इंडिया का सबसे ज्यादा विस्तार छोटे – छोटे शहरों और गाँवों में होने वाला है और आने वाले समय में सबसे ज्यादा लोग मोबाइल से इंटरनेट का उपयोग करेंगे । इसलिए गूगल, माइक्रोसाफ्ट और एप्पल जैसी कम्पनियां हिंदी के एप्स को काफी बढ़ावा दे रही है ।
सन 2000 में हिंदी का पहला वेबपोर्टल अस्तित्व में आया तभी से इंटरनेट पर हिंदी ने अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी जो अब लोगों में अपनी गहरी पकड़ बना चुकी है । नयी पीढ़ी के साथ – साथ पुरानी पीढी‌ ने भी इसके महत्व को भली – भांति समझ लिए हैं । प्रारम्भ में इंटरनेट पर हिंदी का सफर रोमन लिपि से शुरू हुआ और फॉन्ट जैसी समस्याओं से जूझते हुए धीरे – धीरे यह देवनागरी लिपि तक पहुँच गयी । यूनीकोड, मंगल जैसे यूनीवर्सल फॉन्टों ने देवनागरी लिपि को संगणक पर नया जीवन प्रदान किया है । आज हिंदी साहित्य से सम्बंधित इंटरनेट पर हिंदी लगभग सत्तर ई-पत्रिकाओं देवनागरी लिपि में उपलब्ध है ।
इंटरनेट पर हिंदी बहुत जोर – शोर से साहित्यिक प्रसार करते हुए कहानी, नाटक, उपन्यास से आगे बढ़ते हुए महापुरूषों के जीवनियों, चिकित्सा, विज्ञान के क्षेत्र में और विश्व की अन्य भाषाओं से कदम से कदम मिलाकर चल रही है । इस बात को हम भली – भांति जानते है कि भारत के अधिकतर लोग हिंदी में ही अपने विचारों का आदान – प्रदान करते है । आज सभी आवश्यक वेबसाइटों के हिंदी संस्करण मौजूद है । पूंजी बाजार नियामक सेबी, बीएसई, एनएसई, भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय स्टेट बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय लघु विकास उद्योग बैंक की वेबसाइटे हिंदी में भी उपलब्ध है । इस सम्बंध में अभी तक सबसे सराहनीय कार्य महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) ने किया है ।
देश की 70% से अधिक आबादी हिंदी भाषा में अपने को अभिव्यक्त करती है । आज ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, मारीशस, फीजी, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और टोबैको जैसे देशों में हिंदी बोलने वालों की तादाद अधिक है । इस आंकड़े से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि दुसरे देशों में भी हिंदी का प्रचार – प्रसार बढ़ रहा है । इंटरनेट की दुनियां में गूगल तो बादशाह का स्थान बना लिया है । राजभाषा (हिंदी) समाहित कम्प्यूटर लोगों के स्वाभिमान को सवाँरने में काफी सहयोगी हुआ है । वास्तव में अपनी भाषा में काम करना एक अलग ही खुशी देता है । अब हिंदी में संगणक पर कार्य करना बहुत ही सरल हो गया है । ऐसी बहुत सी सुविधाएं उपलब्ध है जिनका लाभ उठाकर अपने देश की भाषाओं और विदेशी भाषाओ में उपलब्ध ज्ञान को हिंदी में उपलब्ध कराने का कोई ठोस प्रयास सरकार करे या करने वालों को सहारा दे, तो हिंदी भाषा का विकास और अधिक बढ़ जाये, हिंदी राष्ट्र भाषा ही नहीं विश्व भाषा बनने के पूरे होते सपने बखूबी देख सकेगी और एक बात यह भी तय है कि इसके लिए बहुमुखी व बहु-आयामी प्रयास की बहुत जरूरत है ।
भारत में लगभग आठ करोड़ लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं । हिंदी में वेबसाइट्स और ब्लॉग़ ने इंटरनेट की दुनिया में अपना परचम लहराया है और आज एक लाख से ज्यादा ब्लॉग हिंदी भाषा में है । हिंदी में टाइप करने की सहूलियत से बड़ी संख्या में व्हाट्सऐप, और फेसबुक जैसे प्लेटफार्म पर हिंदी में संवाद करने की आजादी दी है । माइक्रोसॉफ्ट यूनिकोड इंटरनेट पर हिंदी के लिए आज भी सबसे ज्यादा प्रचलित माध्यम है । माइक्रोसॉफ्ट का ट्रांसलेटर फोटो, आवाज और टेक्स्ट हर तरह से अनुवाद कर सकता है ।
अगर हम इंटरनेट का उपयोग शिक्षा के लिए करना चाहते है तो भी हम बड़े आसानी से कर सकते है । इसपर बहुत सी ऐसी वेबसाइट उपलब्ध है जो हमे शिक्षा से जोड़ती है । हम घर बैठे ही दुनिया के बेहतरीन शिक्षको से ज्ञान ले सकते है । आज हिंदी के पंद्रह से भी अधिक सर्च इंजन है जो किसी भी वेबसाइट का चंद मिनटों में हिंदी अनुवाद करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर देते हैं । याहू, गूगल और फेसबुक भी आज हिंदी में उपलब्ध है । अब संगणक से निकलकर हिंदी मोबाइल में न केवल पहुँच चुकी है बल्कि भारी संख्या में लोग इसका उपयोग भी कर रहे है । आज मोबाइल तक हिंदी की पहुँच ने देश में देवनागरीय लिपि के समक्ष खड़ी चुनौती को काफी हद तक मिटा दिया है ।
आज के 15 साल पहले जब हम हिंदी के भविष्य पर विचार करते थे तो अधिक लोगों का कहना था कि हिंदी का भविष्य तो उज्ज्वल है लेकिन हमारी लिपि पर बड़ा संकट मडरा रहा है लेकिन आज इस समस्या का समाधान हो चुका है । हिंदी को लेकर उत्साहजनक बात इंटरनेट पर आई ट्वीटरों की बाढ़ भी है जिस पर हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग हो रहा है । प्रोफेसर, डॉक्टर, राजनेता, अभिनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, खिलाड़ी, आदि सभी ट्वीटर का प्रयोग कर रहे है । हाल ही में हिंदी के इस्तेमाल के दो और नये स्थान देखने को मिले है । जिन पर आज से पाँच साल पहले सोचा भी नहीं जा सकता था । डीटीएच और क्रिकेट के स्कोर बोर्ड हमारे सामने हिंदी को नए रूप में प्रस्तुत कर रहे है । डीटीएच ने किसी भी चैनल के हिंदी में अनुवाद की सुविधा दे रखी है । हम जानते है कि भारत की अधिकतर आबादी हिंदी में ही अपने विचारों का आदान – प्रदान करती है या करना चाहती है ।
अब तो आने वाला समय हिंदी का ही है । बस कुछ दकियानूसी और अदूरदर्शी सोच वाले ही हिंदी के प्रति नकारात्मक भाव व्यक्त कर रहे है । आज के समय में न तो हिंदी की सामग्री की कमी है और न ही पाठकों की । हां विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में अभी और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है जिससे इसका पूर्ण लाभ आम आदमी को मिल सके । हिंदी का एक मजबूत पक्ष यह भी है कि यह बाजार की भाषा बन चुकी है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी उपयोगिता सिध्द करने के लिए पर्याप्त है । आज के दैनिक समाचार पत्रों के ई-संस्करण पाठको के लिए वरदान साबित हुई है क्योकि कोई भी पाठक केवल एक या दो अखबार खरीद सकता है मगर समाचार पत्र इंटरनेट पर उपलब्ध होने से वह सभी को थोडें खर्च में देख – पढ़ सकते है । ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं और छोटे व्यवसायों और उद्यमियों के लिए ऑनलाइन खरीदारी तेजी से बढ़ी है । क्योकि यह कम्पनियों को एक बड़े बाजार की सेवा या पूरी तरह से ऑनलाइन वस्तुओं और सेंवाओं को बेचने के लिए इंटरनेट पर व्यापार से व्यापार और वित्तीय सेवाओं को पूरे उद्योगों में आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ता है ।
इंटरनेट आज के समय में हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है । पूरी दूनिया आज इंटरनेट के माध्यम से आपस में जुड़ी हुई है । कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जहाँ पर इंटरनेट का प्रयोग न किया जा रहा हो ।
संदर्भ-
1- इंटरनेट का इतिहास

डॉ. अर्चना दूबे

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