पति-पत्नी

पति-पत्नी

मैं और तुम
और फिर हमारे बच्चे
एक संसार बन गए,
और फिर सभ्यता और संस्कृति
के मिसाल बन गए
मिसाल बन इतिहास के पन्नो में
एक अध्याय बन गए
मैं और तुम
कितना छोटा सा लगता
ये शब्द जाल
पर कितना गहरा ये माया जाल
मोह से घिरे
टूटने-बिखरने से डरे-डरे
मैं और तुम
चिर शाश्वत,निरंतर
प्रेम की परिभाषा
प्रेम की पराकाष्ठा
प्रेम अपरिमित
प्रेम सेवा
प्रेम त्याग
प्रेम निर्णय बेमिसाल
प्रेम आयोजन
प्रेम समायोजन
प्रेम त्योहार
मैं और तुम
हाँ मैं और तुम का जुड़ना
कितने रहस्यों से मिलना
रहस्यों में बंधना
रहस्यों में उलझना
रहस्यों से सुलझना
और फिर
एक रहस्य बन
ब्रह्मांड की उत्पत्ति में
हो सहायक
कितने और रहस्यों की
उत्पत्ति एवं उद्गार का
बन कारण
यूँ ही चल रहा
चिर-निरंतर हो शाश्वत
बन प्रकृति की एक उपमा
प्रकृति की ही महिमा
प्रकृति की गोद मे
एक जीवन ,एक संसार को लिये
जिये जा रहे
मैं और तुम
हाँ, में और तुम.
@अपर्णा झा.

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Aparna Jha

परिचय: अपर्णा झा,मिथिलांचल की बेटी,फरीदाबाद निवासी है.इन्होंने विषय द्वै (फ़ारसी एवं museology क्रमशः दिल्ली के जेएनयू एवम राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान)परास्नातक किया है सम्प्रति ये लेखन कार्य से जुड़ी हुई हैं.अनेकों साझा संग्रह एवं राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं,वेब,अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में इनकी लघुकथा,आलेख,एवं रचनाएं प्रकाशित हुई हैं.सांस्कृतिक स्थलों में भ्रमण और हिन्दुस्ततानी संगीत सुनने का शौक है.पूर्व में इन्हें तीन साल का संग्रहालय के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव है.MY POINT of VIEW इनका पेज है ,My first blog और maithil point of

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