जंगल

जानवर सिर्फ जंगलो में ही नही होते,

घात लगाऐ,

किसी पत्थर की ओट में,

या पत्तो के पीछे छिप कर,

गर्दन पर हमला करते,

एक बार में ही काम-तमाम,

नोचते मांस को,

जानवर इंसानो के अंदर भी होते है,

उसकी मुस्कुराहट के पीछे,

उसकी मीठी जबान के नीचे,

उसके चेहरे के आवरण में घात लगाऐ,

जंगल के जानवर

जब क्षुधा मिटा लेते है

कुदरत की भोजन-क्षृंखला का हिस्सा होकर

तृप्त से,

शांतचित हो जाते है,

पर इंसान के अंदर बैठे जानवर की

भूख नहीं मिटती कभी,

हमेशा अतृप्त

नोचने को तैयार ,

जंगल सिर्फ बाहर ही नहीं होते…

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