मन की कल्पना

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मन की कल्पना

By |2017-08-09T08:19:25+00:00August 8th, 2017|Categories: कविता|0 Comments


ऐ चांद तुझको नाव बनाकर आकाश में तैरायेगें
इन्द्रधनुष की पतवार बना रंगों से हम भर देंगे
मैं इश्क हूँ तू हुस्न है हम एक दूजे का प्यार हैं
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नीले नीले नील गगन में ख्वाबों के पल भर देंगे
आकाश में इन्द्प्रिया से मिलने भी फिर जाएगें
ऐ चांद तुझको नाव बनाकर आकाश में तैरायेगें
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बादल के लच्छे जो भाग रहे हैं उन गोलों को पकड़ेगे
फहराता है तेरा आंचल उड़ती जुल्फों को न छेड़गे
ऐ चांद तुझको नाव बनाकर आकाश में तैरायेगें
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सब या हों पहेर बस तेरा नाम पहेर होगा
सजर मुहब्बत होगी अपनी परवाने भी जल जाएगें
ऐ चांद तुझको नाव बनाकर आकाश में तैरायेगें
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