घास काटती औरतें

घास काटती औरतों से

सीखा जा सकता

समय को छप-छपाक काटने का हुनर

उनकी स्मृतियाँ

दराती के धार में समा गई हैं

उन्हें याद नहीं

अपने बचपन की सहज आदतें

खेल-खिलौने और सहेलियों के नाम

अब वे बहुत कुछ

भूलने में करने लगीं भरोसा

कोई बता दे सही

दुःख काटने की दराती

नहीं बनी आज तक |

हिन्दी लेखक – संतोष कुमार तिवारी

साभार ( दैनिक जागरण )

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