संघर्ष

अनन्त संघर्षों का मेला
अन्तहीन राहें न झूटती सी डगर
अभिप्राय हैं ये अम्बर तक
भेद कहां कोई पा पाया
नवपल्लव कोमल तरू
नवप्रवर्तन हो जैसे वृक्षों का
नव राहें नयी जिन्दगी
प्रशस्थ बन नव जीवन का
उदेश्य प्रशस्त कर जीवन का
नीरसता मत फैला उत्साह भर
संचार कर नवीन नित भेदों का
वेद पुराण नित नये ग्रन्थों का
अर्जन कर जीवन के अन्दर

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