मोहिनी

चलत मटकत नलिन मोहिनी
अन्त्य तरुणी तरंगें चमकाएं
इठलाती बलखाती रागिनी
अदभुद अनुपम रूप दिखलाए
समस्त अनुपम मोंगरा अनूठी
सवत्र सवत्र खुशबू फैलाएं
देखत ही पलक हटत नहीं
जो देखे बेसुध मोहित हो जाए
तेरे काले काले केशु उड़ रहे
जीवन वहीं अटक लटक जाए

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