कर्मों का खेल

जैसा तुने किया वही पाएगा कर्मों किया कहां जाएगा
दोष देते हो क्यूँ भगवान् को दुख परिणाम तेरा खुद का ही है

हर पल कहते हो भगवान् से तुने हम पर किए क्यूं इतने जुल्म
मैंने तेरी पूजा करी ध्यान से उपवास किए हैं बड़े चाव से

दुख की बरसात क्यूँ घर में मेरे तुने कांटे दिए दामन मेरे
पूजा क्यूँ नहीं फली घर में मेरे ऐसे भी मेरे क्या करम थे

भगवान् किसी का कुछ करता नहीं दुख पाले हैं अपने किए
भूल जाते हो तुम दुख देते समय आत्मा को दुखाना बडा़ पाप है

समझने लगते हो अपने को खुदा सामने वाला कोई दास है
कहां जाएंगे ऐसे करम गिरेबान में जाके तुम देखो तो सही

पहले अपनी कमियों को पहचानो फिर दोष दो किसी और को
जैसा किया वही पाएगा कर्मों किया कहां जाएगा

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