प्यार की नाव

चाहत की नदियाँ में
प्यार की नाव को रखा
दिल की कागज़ से बनाया था इसे
अभी भिंगाओ ना इसे

जिंदगी के घेरों से दिल रैन-शबर
साँसों की खुशबू में सजाया था इसे
बस अभी भिंगाओ न इसे

कितने ख़्वाब बुने थे,कितने उम्मीदें थी
अभी तो धारा में लगाया था इसे
अभी तो भिंगाओ न इसे

कागज की नाव थी
उस पर सपनों का महल था
गम की साये से दूर खुशियों का पहल था

अभी तो खुशियों के आँसुओ से सजाया था इसे
अभी तो भिंगाओ ना इसे

चाहत की नदियाँ में
प्यार की नाव को रखा
दिल की कागज़ से बनाया इसे
अभी भिंगाओ न इसे

रचनाकार-मु.जुबेर हुसैन

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मु. जुबेर हुसैन

मु.जुबेर हुसैन बी.एस.सी (पॉर्ट-1 ,appearing) एस.बी.एस.एस.पी.एस. जनजातिय महाविद्यालय, पथरगामा गोड्डा,झारखण्ड,814147

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