एहसास

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एहसास

By |2017-08-18T08:07:12+00:00August 18th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

तुम मेरी कोरी कल्पना का
मीठा सा एहसास हो,
जो बन जाये साधारण सी कविता
उन अक्षरों का विश्वास हो,
तुम ख्वाबों में शामिल
या ख्यालों में धुमिल हो,
मेरी अल्मारी में रखी पुरानी किताबो में
प्रेम पत्र के पन्नों में, इत्र की खुशबू से
आज भी मेहकते हो,
तुमसे एक गुजारिश है
अब ख्वाबो में मिलना, आके छेड़ना छोड़ दो
आ भी जाओ सामने, मेरे बनकर
एक बार मेरे सिर पर, घूंघट तो डाल दो
तुम आये और आकर चले गये
क्यूँ मुझे ना एहसास हुआ
हमारा मिलना क्या धरती और आकाश हुआ
सच कहती हूँ, अब ये जान पायी
अपने होने का कुछ एहसास
ना होने से हुआ
खुद से मिलना मेरा
आप जैसा शक्स के खोने से हुआ
वजूद हिल गया मेरा
जब मुझसे मेरी मुलाकात हुई
अधुरे रह गये ख्वाब
और मिट गयी खुशियां
जब प्रेम में डूबे सागर की
गहराई की हार हुई…..

@रजनी शर्मा

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