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अनुभव पत्रिका

नव प्रकाशित रचनाएँ

सूनापन
एक विवाहिता जिसने विवाहित जीवन की शुरुआत में ही अपने सुहाग को खो दिया उसके मन के भाव नैनो में...
पूरा पढ़ें ... "सूनापन"
विश्राम स्थल
धुंधले धुंधले साये हैं रोशनी मिट रही है रंग धूल रहे हैं भोर थक गई है सांझ हो चली है...
पूरा पढ़ें ... "विश्राम स्थल"
इश्क़
ज़मीं पर गिरी बारिश की पहली बूँद सा है वो तन पर मलय की छुअन की पहली सिहरन सा है...
पूरा पढ़ें ... "इश्क़"
बेटिया ही ख़ुशी बेटिया ही खजाना
बेटिया ही ख़ुशी बेटिया ही खजाना || बेटियों को न यारो गर्भ में गिराना || इन्ही से है रिद्धि इन्ही...
पूरा पढ़ें ... "बेटिया ही ख़ुशी बेटिया ही खजाना"
भूख – प्यास की क्लास ….!!
भूख - प्यास की क्लास ....!! तारकेश कुमार ओझा क्या होता है जब हीन भावना से ग्रस्त और प्रतिकूल परिस्थितियों...
पूरा पढ़ें ... "भूख – प्यास की क्लास ….!!"
शुरुआत
अधजली सी लाश मैं हरियाली से भरूं श्वास मैं पानी से समझूं प्यास का अर्थ बादल जो बरसे घनघोर बारिश...
पूरा पढ़ें ... "शुरुआत"
फटा नोट
वो नोट जो फटा था, मेरी जेब में पड़ा था। बैचेन मन उसका बड़ा, देखूँ मैं सारा जहां। ठुकराया गया...
पूरा पढ़ें ... "फटा नोट"
चन्द्रग्रहण
चाँद कहे धरा से थोड़ा सा तो खिसक ले, कर लूँ दीदार मैं भी अपने चमन का, अब कुछ घुटन...
पूरा पढ़ें ... "चन्द्रग्रहण"
हम है अथाह सागर
सज धज के तुम खड़ी हो॥ ममता का लेके गागर॥ हम है अथाह सागर॥ तुमको समेट लेंगे॥ मूर्छित हुआ मेरा...
पूरा पढ़ें ... "हम है अथाह सागर"
विलुप्त प्राय हमारा भविष्य
सुनकर आश्चर्य हो रहा है! परंतु यह वास्तविकता के काफ़ी नज़दीक है। पहले हमने सुना होगा की गिद्ध जैसे अनेक...
पूरा पढ़ें ... "विलुप्त प्राय हमारा भविष्य"
नीलकंठ
नीले आसमां से नीली बारिश ने सब कुछ नीला कर दिया नीले रंग से सब नहला दिया नीला रंग सब...
पूरा पढ़ें ... "नीलकंठ"
पता नहीं
मैं तुम्हारे दिल से दूर तुम मेरे कितने करीब रो रही तुम किस बात पे आखिर कैसे पोछो तुम्हारी आंखों...
पूरा पढ़ें ... "पता नहीं"
आदत
एक गंदे नाले के कीचड़ में रहने की कई बार पड़ जाती है इतनी बुरी आदत कि किसी ब्रह्म सरोवर...
पूरा पढ़ें ... "आदत"
विडम्बना
क्या करें क्या विडम्बना है सबकुछ विचित्र है शरीफ घर और बाहर सब जगह पिट रहे हैं और गुंडे बदमाशों...
पूरा पढ़ें ... "विडम्बना"
अफसोस
क्या मीठा क्या कड़वा क्या सच क्या झूठ खामोश हैं आपस में कोई संवाद नहीं दूरियां हैं इतनी कि पाटना...
पूरा पढ़ें ... "अफसोस"
नया बचपन
ना लकड़ी की काठी है, ना काठी का घोड़ा ....... कोका-कोला संग आंख मारता, नन्हा मन दौड़ा । नानी की...
पूरा पढ़ें ... "नया बचपन"