और भी दूँ

By | 2016-03-31T00:51:45+00:00 March 31st, 2016|कविता|Comments Off on और भी दूँ

मन समर्पित , तन समर्पित ,
और यह जीवन समर्पित ।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी दूँ ।

माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, अकिंचन
किन्तु इतना कर रहा, फिर ।भी निवेदन |
थल में लाऊँ सजाकर भाल जब भी ,
कर दया स्वीकार लेना यह समर्पण ।

गान अर्पित , प्राण अर्पित,
रक्त का कण – कण समर्पित |
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी दूँ !

माँज दो तलवार को, लगाओ न देरी,
बाँध दो कसकर कमर पर ढाल मेरी |
भाल पर मल दो चरण की धूल थोड़ी,
शीश पर आशीष की छाया घनेरी |

स्वप्न अर्पित , प्रश्न अर्पित ,
आयु का क्षण – क्षण समर्पित |
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी दूँ !

-रामावतार त्यागी

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