हरिवंश राय बच्चन

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तुम तूफान समझ पाओगे?

By | 2018-02-11T17:01:25+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , , |

तुम तूफान समझ पाओगे? गीले बादल, पीले रजकण, सूखे पत्ते, रूखे तृण घन ले कर चलता करता 'हरहर' - [...]

जीवन की आपाधापी में

By | 2018-02-11T17:01:26+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , |

जीवन की आपाधापी में कब वक्त मिला कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँ जो किया, कहा, [...]

क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

By | 2018-02-11T17:01:26+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , , |

अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर, पलक संपुटों में मदिरा भर, तुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिया [...]

कहते हैं, तारे गाते हैं

By | 2018-02-11T17:01:26+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , |

कहते हैं, तारे गाते हैं। सन्नाटा वसुधा पर छाया, नभ में हमने कान लगाया, फिर भी अगणित कंठों का [...]

किस कर में यह वीणा धर दूँ?

By | 2018-02-11T17:01:27+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , , |

देवों ने था जिसे बनाया, देवों ने था जिसे बजाया, मानव के हाथों में कैसे इसको आज समर्पित कर [...]

था तुम्हें मैंने रुलाया!

By | 2018-02-11T17:01:27+00:00 February 8th, 2018|Categories: कविता, हरिवंश राय बच्चन|Tags: , , |

हा, तुम्हारी मृदुल इच्छा! हाय, मेरी कटु अनिच्छा! था बहुत माँगा ना तुमने किन्तु वह भी दे ना पाया! [...]