गायत्री स्तोत्र

सुकल्याणीं वाणीं सुरमुनिवरैः पूजितपदाम शिवाम आद्यां वंद्याम त्रिभुवन मयीं वेदजननीं परां शक्तिं स्रष्टुं विविध विध रूपां गुण मयीं भजे अम्बां गायत्रीं परम सुभगा नंदजननीम विशुद्धां सत्त्वस्थाम अखिल दुरवस्थादिहरणीम् निराकारां सारां सुविमल तपो मुर्तिं…

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दुर्गा चालीसा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अंबे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत…

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हनुमान चालीसा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

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