मेरी बात

घर जाता हूँ तो मेरा ही बैग मुझे चिढ़ाता है, मेहमान हूँ अब ,ये पल पल मुझे बताता है .. . माँ कहती है, सामान बैग में डाल लो, हर बार तुम्हारा कुछ…

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तारकेश्वर : गरीबों का अमरनाथ ….!!

तारकेश्वर : गरीबों का अमरनाथ ....!! तारकेश कुमार ओझा पांच, दस, पंद्रह या इससे भी ज्यादा ...। हर साल श्रावण मास की शुरूआत के साथ ही मेरे जेहन में यह सवाल सहजता से…

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विलुप्त प्राय हमारा भविष्य

सुनकर आश्चर्य हो रहा है! परंतु यह वास्तविकता के काफ़ी नज़दीक है। पहले हमने सुना होगा की गिद्ध जैसे अनेक पक्षी एवं जानवर या तो विलुप्त हो गए हैं या विलुप्त प्राय है।…

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बादल बिजली का संग

सावन के पहले आता है आषाढ मास,जब बादल बिजली का साथ होता है.आसमान मे बादल छाते है ,बारिश होती है,और घटाओं के छाने से अंधेरा हो जाता है. मेंढकों की आवाज गूंजती है…

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पहाड़ का अस्तित्व- ( पहाड़ की नारी)

नारी के बिना पहाड़ अधूरा - या यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि पहाड़ का अस्तित्व ही नारी के कारण टिका हुआ है यदि पहाड़ों से कुछ हद तक पलायन रुका है…

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सांस्कृतिक महोत्सव डोटल गाँव (मई -2019)

सांस्कृतिक महोत्सव डोटल गाँव (मई -2019) डोटल गांव सेवा समिति दिल्ली एक ऐसा नाम जो परदेस में रहकर भी अपने लोगों अपनी संस्कृति अपनी विरासत, अपने शहर में रह रहे समस्त परिवार को…

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वेलेंटाइन एक अभिशाप

“14 फ़रवरी 1931 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने वायसराय को टेलीग्राम किया और अपील की कि भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को दी गई फांसी की सज़ा को उम्रक़ैद की सज़ा में बदल दिया जाए।” लेकिन

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