सेहत हज़ार नियामत

आजकल हमारी जीवन शैली कुछ इस तरह  की  हो गयी है कि हम सुबह से लेकर  शाम तक एक मशीन की तरह काम करते हैं. क्या करें ! ज़माने के साथ कदम ताल…

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सात दिन की माँ

यह कथा सत्य घटना पर आधारित है| गोपनीयता बनाए रखने के लिए पात्रों के नाम और स्थान बदल दिए गए हैं| *कहते हैं, ईश्वर की मर्जी के आगे किसी की नहीं चलती और…

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बालश्रम

बचपन, मानव जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण चरण है. औपचारिक शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से बच्चों को देश, काल व परिस्थिति से अवगत कराते हुए इसी चरण में उन्हें एक सुरक्षित भविष्य की…

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साहित्य और युआ वर्ग -अपेक्षाएं और सरोकार

" साहित्य जनता की चित्तवृत्तियों का संचित प्रतिबिम्ब होता है " - यह कथन है आचार्य रामचंद्र जी शुक्ल का। कितना सही कहा है आचार्य जी ने । वर्तमान में साहित्य के, युवा…

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शिक्षा और शैक्षिक वातावरण

शिक्षा देने के लिए एक शिक्षक ही हो ऐसा कोई जरुरी नहीं है। मैं ये बात पूछना चाहती हूं कि पुराने समय में हमारे माता पिता जब शिक्षित नहीं थे यानी उन्हें अक्षर…

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“सड़क”

भारत देश में "सड़क" सिर्फ़ एक नाम नहीं अपने आप में वह दुनिया है। जहाँ जीवन के हर रंग गाहे-बगाहे देखने को मिल जाता है, हर कोई उस पर किसी न किसी उद्देश्य…

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दिमाग में लाल बत्ती की ठसक बरकरार

लाल बत्ती प्रकरण, जीहाँ गाड़ी से लाल बत्ती उतरने का फरमान जारी हो चुका है, तथा कई नेताओं ने अपने गाड़ी की लाल बत्ती उतारने में तनिक भी देरी नहीं कि,...तत्परता दिखाते हुए हुए…

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 हिन्दी कविता को कविवर गोपाल सिंह नेपाली का अवदान

देश और समाज के समर्पित प्रहरी और ज्योतिवाही कवियों में श्री मैथिलीशरण गुप्त, श्री माखनलाल चतुर्वेदी,श्री सोहनलाल द्वेदी तथा श्री गोपाल सिंह नेपाली का नाम ससम्मान लिया जा सकता है | कविवर नेपाली…

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नागार्जुन की प्रकृति कविता

यद्यपी नागार्जुन की कविता प्रमुख रूप में समसामयिक सामाजिक राजनीतिक संदर्भ की कविता है, तथापि इससे इतर संदर्भों की भी अनेक कविताएँ उनके यहाँ प्राप्त होती है।उन इतर सन्दर्भ परक व कविताओं पर…

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बालश्रम

बचपन, मानव जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण चरण है. औपचारिक शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से बच्चों को देश, काल व परिस्थिति से अवगत कराते हुए इसी चरण में उन्हें एक सुरक्षित भविष्य की…

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‘रामचरितमानस’ का पुनर्पाठ

संत महाकवि तुलसीदास द्वारा लिखित ‘रामचरितमानस’ न केवल हमारे देश का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है बल्कि सम्पूर्ण विश्व के अन्य महाकाव्यों में भी महान् काव्य-ग्रंथ है। कवि शिरोमणि तुलसीदास द्वारा रचित सभी सुकृतियों से…

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शिक्षा का पवित्र मंदिर है। मत बनाओ सियासत का अखाड़ा?..

  वाह रे ! सत्ता की चेष्टा, गद्दी प्राप्ति का प्रयत्न, और शाशन लोभ की पराकाष्ठा ! आईये देखते हैं समझने कोशिश करते हैं । क्या शिक्षा का सही रूप यही है ।…

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मुँह से हाँथ के बीच की दूरी पर संघर्ष , और बुलेट प्रूफ ट्रेन ?

आज के युग में हम बुलेट प्रूफ़ ट्रेन चलाने का प्रयास कर रहे हैं जो काफी तीव्रता से फर्राटा भरेगी उसकी गति विद्युत के समान तीव्र होगी । आश्चर्य जनक बात यह है…

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क्या कानून एवं संविधान की सही परिभाषा यही है

क्या ! भारत का संविधान किसी भी व्यक्ति को यह अधिकार देता है कि वह दूसरे व्यक्ति पर अपना रोब झाड़ सके एवं दूसरे व्यक्ति कि हत्या भी कर सके। इसको बड़ी गम्भीरता…

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आचार्य रामचंद्र शुक्ल

‘इतिहास’ और ‘साहित्य का इतिहास’ दोनों एक दूसरे से किंचित भिन्न हैं। इतिहास वह है जिसका साक्ष्य प्राप्त है और साहित्य का इतिहास वह है जिसमें समसामयिक वास्तविकता को ढूँढा जाता है। इतिहास…

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