सांसों के कारोबार में झोंक दिया

पंखुड़ी से चोटिल थे कांटो पर चला दिया सांसों के कारोबार में हमको झोंक दिया न प्रशिक्षण न कोई हिदायते …

तुझ बिन भी…मैं कस्तूरी हूँ

तूने मुझे केंद्र मानकर मुझसे इश्क़ किया इश्क़ की नयी नयी परिभाषाएँ रची प्रेम में तू उस कम्पास की तरह …

व्यग्र पाण्डेय के काव्य-संग्रह “कौन कहता है…”का विमोचन

राष्ट्रीय सेमीनार (13/05/2017) गंगापुर सिटी (राज.) के अन्तर्गत कवि विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’ के काव्य-संग्रह ” *कौन कहता है…”* का विमोचन …