बिना मेक अप की सेल्फियाँ

  फेसबुक पर दो दिनों से महिलाओं की बिना मेकअप की सेल्फियों का दौर चल रहा है। यह तो पता नहीं यह ट्रेंड कब और किसने शुरू किया लेकिन दो दिनों में कई महिलाओं…

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आशिकी

मेरी आशिकी में कसर रह गई हैं कमी है दिल में एक कसक रह गई हसीना मेरी बाहों में आई जुम्मे जुम्मे दिदार ए यार हुआ जुम्मे जुम्मे गुफ्तगू यार से अधूरी बाकी…

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सांसों के कारोबार में झोंक दिया

पंखुड़ी से चोटिल थे कांटो पर चला दिया सांसों के कारोबार में हमको झोंक दिया न प्रशिक्षण न कोई हिदायते दी यारो सांसों के कारोबार में हमको झोंक दिया न मां की चीत्कार…

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अपनी धुन

मैं बाबरी कुछ बेतल सी आवारा कुछ लगती पागल सी जाने क्या मैं सोच में रहती बस अपनी ही धुन में रहती मैं उपवन में जाती हूँ तो सारे पौधे मुझसे मिलते घुमड़…

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धरती का दुख

माँ का रूप दिया तुमने धरती माता मैं कहलाती धरा भूमि पृथ्वी जननी पर्यायवाची हैं शब्द मेरे दीनबंधु ने भार दिया मुझको वैभव समृध्दि प्रदान करी निपुण प्राणी कितना है मिथ्या छद्मी से…

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मजदूर की बेटी

मां मुझको पढ़ने जाना है मुझको भी आफिसर बनना तुम सारे दिन मजदूरी करती सारे दिन गिट्टी तोड़ा हैं करती रेती तु छाना करती है मुझको ऐसा नहीं बनना है मां मुझको पढ़ने…

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तुझ बिन भी…मैं कस्तूरी हूँ

तूने मुझे केंद्र मानकर मुझसे इश्क़ किया इश्क़ की नयी नयी परिभाषाएँ रची प्रेम में तू उस कम्पास की तरह था जिसका एक छोर मेरे केंद्र पर था तो दूसरा परिधि को गढ़ने…

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रिश्ते

रिश्ते अब तो रिसने लगे हैं कभी - कभी तो टीसने भी लगे हैं आजकल इतने बनावटी और खोखले हो गए हैं रिश्ते कि ऊपर से कछुए जैसी मोटी खाल का मुखौटा लगा…

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नानी माँ

नानी को भगवान कृष्ण के वागे (पोशाख )बनाने का शौक था ,यही उनकी कृष्ण के प्रति सेवा भक्ति भी थी | वे अपनी बुढ़ी आखों से हाथ सिलाई मशीन पर नित्य वागे सीकर…

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व्यग्र पाण्डेय के काव्य-संग्रह “कौन कहता है…”का विमोचन

राष्ट्रीय सेमीनार (13/05/2017) गंगापुर सिटी (राज.) के अन्तर्गत कवि विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र' के काव्य-संग्रह " *कौन कहता है..."* का विमोचन श्री सी.आर. चौधरी (मान. केन्द्रीय मंत्री,भारत सरकार), डा. श्रीमती किरण माहेश्वरी (उच्च शिक्षा…

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भाग्य लेख

  शिवानी बच्चों  को रात खाना खिला कर सुला चुकी थी और रणजीत के आने की प्रतीक्षा कर रही थी . दस बज चुके थे .शिवानी को भूख भी लग रही थी और…

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मैया और मौसी

गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी इन दोनों को बदनाम करे, पड़ोसन मुँहझौंसी मैया जैसी गैया भैया, हमको तो दूध पिलाती है निज जिह्वा से चाट-चाट, हमको वो दुलराती है मैया…

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