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बाल मन Archives - हिन्दी लेखक डॉट कॉम

उठो प्यारे लाल

उठो प्यारे लाल अब सुबह हो चुकी है, पंछियां चहचहा रही हैं अब उठो प्यारे लाल,देखो प्यारी-प्यारी किरणें जग को सुंदर बना रही हैं, आलस त्याग कर सारें काम पर जा चुके हैं,…

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हिप हिप हुर्रे

पिछले एक घंटे से उसके हाथ मोबाइल पर जमे हुए थे। पबजी गेम में उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधे घंटे की मशक्कत के बाद वो…

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एक था बचपन

एक  था  बचपन ,एक था  बचपन , भोला सा ,प्यारा  सा  ,नन्हा सा बचपन . क्यों  हैवानियत का ग्रास बना  बचपन ?   वोह  नटखटपन ,वोह शोखियाँ और  शरारतें , वोह अल्हड़पन ,…

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प्रतिस्पर्धा

राहुल   अपनी  कक्षा   का   सबसे   मेघावी   व्  बुध्धिमान  छात्र   था. पढाई   के साथ-साथ   वह   विद्यालय   में होने वाली अन्य  गतिविधियों-खेल कूद व् सांस्कृतिक   कार्यक्रमों   में भी बढ़-चढ़  के भाग लेता था.  विद्यालय   के  …

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अनाथ – नाथ

उसे नहीं  मालूम था अनाथ क्या  होता है वह तो बस इतना जानती थी के माँ हमेशा नाथ-नाथ पुकारती रहती थी उसने माँ को पूछा था माँ  नाथ  क्या होता है माँ ने…

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मामा

" लाली.. यह गठरी जरा अपने सर पर ऱख लो अब मुझसे और इसका बोझ न उठाया जायेगा"... नानी को जल्दी थी गठरी में बंधी रूई से नयी रजाई बनवाने की ताकि उनकी…

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