गीत-ग़ज़ल

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झूठ एक अनबूझ पहेली

By | 2018-04-17T18:33:09+00:00 April 17th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |

वो झूठ ही है जिसने कितनो का दिल दुखाया है वो झूठ ही है जिसने कितनो को रुलाया है.. वो झूठ ही है जिससे अपने दूर हो गये वो झूठ ही है जाने कितने मजबूर हो गये.. वो झूठ ही है जो सत्य पर खडा़ मुस्कुराया है वो झूठ ही है जिसने कितनो का घर जलाया है.... वो झूठ ही है जहाँ रिश्ते बेईमान बन [...]

क्या हम बदल गये

By | 2018-04-16T23:43:14+00:00 April 16th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |

इन कायरो की बस्ती में रहना दुश्वार हो रहा है... कोई मुसलमां का तो कोई हिन्दु का तलबगार हो रहा है... जिनके साथ सुख दुख अपना बाँटते थे अब तक.... उन्हीं का हमारे जख्मों पर वार हो रहा है... जँहा [...]

दूध के धुले लोग … (ग़ज़ल)

By | 2018-04-06T21:24:26+00:00 April 6th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |

दूध  के धुले  लोग  कुछ हमसे  अलग होते हैं, हाँ  !  उनमें सुर -ख्वाब के पर  लगे होते हैं [...]