देश की स्वतंत्रता का आज ऐसा हाल है

चंद पैसों के लिये ही जिंदगी को मारता
रात दिन करके वो मेनत जीतकर भी हारता

आज क्या कह रहा रिसाल पता चल जाए

हामी भरते है हर एक बात में सहमते है ओ
उनके जेहन में क्या सवाल पता चल जाये

क्या लिखूं तेरे बारे , जितना लिखूं कम ही कम है

फुलवारी में खिले फूलों सी
तेरी खुशबू मेरी साँसों में घुल रही है
समुन्दर की लहर सी￰ तू भी मेरे
इक यादों को…