ख़ुद्दारो की खुद्दारी देख ली।

ख़ुद्दारो की खुद्दारी देख ली। मैन ये दुनियादारी देख ली।। तारीफ करो कुछ भी ऐसा नही यहां। ज़िंदा मुर्दों की आज लाचारी देख ली।। बिन रिश्वत कुछ भी नही होता यहां।। आज मैंने आदत ये…

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पैमाने के दायरों में रहना… (नज़्म)

पैमाने के दायरों में रहना, छलक जाओ तो फिर ना कहना... जो जहां लकीरों की कद्र में पड़ा हो उस से पंखों के ऊपर ना उलझना... किन्ही मर्ज़ियों में बिना बहस झुक जाना,…

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भोर होते पास मेरे आ गए हो..

भोर होते पास मेरे आ गए हो, रात से शायद बहुत घबरा गए हो। और क्या इससे बड़ा उपकार होगा, कंटकों से पथ मेरा बतला गए हो।   तन से मन से प्राण…

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तुम्हारी ही जागीर थोड़ी हूँ

मुकर भी सकता हूँ,वादों और इरादों से में में कोई पत्थर की लकीर थोड़ी हूँ प्यादा था किसी वक्त,पहुँच चूका हूँ आखरी खाने तक में कोई पहले से पड़ा हुआ वजीर थोड़ी हूँ…

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विरह-गीत

विरह – गीत   दूर तलक घनघोर सन्नाटा फैला काली रातों में | सूरज आग उगलता अग्नि- सी भर देता साँसों में | पहले हवा जो छूकर तुझको खुशबू हुस्न की थी लाती,…

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ख़्वाब ऊँचें तू दिखाना छोड़ दे !

  तीर अब दिल पर चलाना छोड़ दे, देख अब यूँ मुस्कुराना छोड़ दे !!   चोट दिल पें यूँ लगाना छोड़  दे , बेवजह अब हम सताना छोड़ दे !!   रात…

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दर्द तिरा कामयाब है 

बालों में चांदी आई तभी  खिज़ाब है मेक अप भी इन हसीनों का सब पे इताब आवारगी में आप ही रच बस गये जनाब कहते हो फिर सभी से ज़माना खराब है किस…

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यादे शहीदो की

यह भारत है अमर शहीदों की गाथा बलिदान की। सत सत बंदन उन्हें करो जो दे कुर्बानी जान की।। 1.अंग्रजो की लोह बेडिया जिने जकड ना पाई हैं, जिने गुलामी की जंजीर सहन नही हो पाई हैं। जिने कसम थी भारत माँ की आन बान और शान की, सत सत बंदन उन्हें करो जो दे कुर्बानी जान की।। यह भारत हैं अमर शहीदों की......... चले सदा काटो के पथ पर और सहे अंगारे हैं, बाँध शीश पर कफन जिन्होंने हुए देश को प्यारे हैं। जिन का था स्वाभिमान तिरंगा जय हो उस बलिदान की, सत सत बंदन उन्हें करो जो दे कुर्बानी जान की।। यह भारत हैं अमर शहीदों की............ अपनी मिट्टी का वीरो ने कैसा कर्ज चुकाया हैं, भगा दिये अंग्रेज देश से अपना फर्ज निभाया हैं। बोल रहा जय दीपू वीरो भारत के स्वाभिमान की, सत सत बंदन उन्हें करो जो दे कुर्वानी जान की।। यह भारत हैं अमर शहीदों की गाथा बलिदान की, सत सत बंदन उन्हें करो जो दे कुर्बानी जान की।। - दीपेन्द्र सिंह

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नम रही ऑख मै रात रोता रहा

नम  रही  ऑख  मै  रात  रोता  रहा , मै   परेशॉ   रहा   बेबसी   के   लिए ! मैने  चाहा  जिसे   बेवफा  हो   गया , जी रहा अब मै थोडी खुशी के लिए !! नम रही…

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जिनको भड़काया गया हो आसमानों के खिलाफ़

जिनको भड़काया गया हो आसमानों के खिलाफ़। वे  भला  चुप  क्यों  रहेंगे हुक्मरानों  के खिलाफ़ ॥1। जिन पूँजिपतियो के हरम मॆ रह रही हो राजनीति। वह भला क्योंकर कहे उन खानदानों के खिलाफ़॥2॥…

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वो क्या शजर है जिसमें न पत्ता दिखाई दे

  वो क्या शजर है जिसमें न पत्ता दिखाई दे। गुलशन का कोना-कोना ही सहरा दिखाई दे।। हद्द हो चली है जेहद ए मुसलसल की काविशे। क्या  बात  है न कोई ,जजीरा  दिखाई…

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मुहब्बत में दिलों को हार कर भी मुस्कराएँ हैं

मुहब्बत में दिलों को हार कर भी मुस्कराएँ हैं । हमीं ने इस जहाँ में प्रेम के दीपक जलाएँ हैं  ।। रखा दिल में गुलाबों को हँसी लब पर रही बाकी । कभी…

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देवी भजन

मैया के द्वारे आ गए दर्शन कैसे पाये। नवरात्रि का मेला लगा है। भीड़ पड़ी है भारी दर्शन कैसे पाये। मैया के द्वारे आ गए........... भक्त खड़े है द्वारे पे मैया चरणों में…

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सूरज आग उगलने लगा है

सूरज आग उगलने लगा है पात पात अब जलने लगा है गर्मी गुस्सा बन कर फूटी मौसम आज बिफरने लगा है तस पानी की बढ़गई इतनी भोजन आज बिसरने लगा है सर से…

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दिल की ख़लिश

ये नहीं कि दिल की ख़लिश पिघल गई, रोने से तबियत ज़रूर थोड़ी संभल गई,   वही मैं, वही तुम, वही है दोस्ती हमारी, फासले से कैफियत ज़रूर थोड़ी बदल गई,   पहले…

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