बहुत दिन गुजर गये

देखे हुये किसी को बहुत दिन गुजर गये । अरमान थे जो दिल के सारे बिखर गये ।। हर इक तरफ़ तो देखो दरिन्दों की भीड़ है । इंसान नेकदिल थे जो जाने…

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तेरे शहर में ये पहर आख़री है

तेरे शहर में ये पहर आख़री है। ये पहल, ये नजर, ये गजल आखरी है। आ सको तो आ जाओ सारी उसूले तोड़ के, दर्द-ए-दिल से भेजा ये ख़बर आखरी है। मैं मर…

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उधार ली हुई ईंटों से

उधार ली हुई ईंटों से मैं कैसा महल बनाऊंगा, मुस्कानों का कर्जा लेकर मैं कैसे मुस्कराऊंगा।   कैसे होंगे गीत ग़ज़ल और कैसी होंगी कविताएं, मांगे छीने कागज़ पर मैं कैसे कलम चलाऊंगा।…

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प्यारी अपनी धरती है

प्यारी अपनी धरती है और प्यारा अपना देश है। हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है।। कुछ लोग यहाँ पर ऐसे हैं, जो धरती को गन्दा करते हैं, उनकी करनी धरनी…

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किसने किया श्रृंगार

किसने किया श्रृंगार प्रकृति का, अरे, कोई तो बतलाओ ! डाल-डाल पर फूल खिले हैं ठण्डी सिहरन देती वात पात गा रहे गीत व कविता कितने सुहाने दिनऔर रात मादकता मौसम में कैसी…

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हिसाब आँखों से दिखाना पडा़

लिख लिख कर हिसाब आँखों से दिखाना पडा़। कमबख्त ना चाह कर भी दुष्मनी निभाना पड़ा। लब्ज तीर से निकले थे दिल को भेदने के लिऐ जमाने के लिऐ हमे हर लब्ज सजाना…

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सरेआम

  सरेआम अपने इश्क  का यूँ न तमाशा  बनाइये। अपने वजूद का खुद ही ज़रा पता लगाइये।। बेमौत मार डालेंगी हमे ये होशमंदियाँ । गर जीने की आरजू है तो खुद को भुला…

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जहर का भी एक समन्दर होना चाहिए

हर शख्स की प्यास पानी से नही बुझती जहर का भी तो एक समन्दर होना चाहिए हिन्दू का राम है मोहम्मद है मुसलमाँ का इंसान का भी तो कहीँ कोई पयम्बर होना चाहिए…

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जो किरनों से मैने …

जो किरनों से मैने पता उनका पूछा, चलाते रहे रात सारी वो हमको। है क्या माजरा, है क्या बात ऐसी, जरा पूछ लो मिल के उनसे सितारों। क्यों धरती है ओढ़े निराशा की…

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विरह में भी मुस्करा के …

विरह में भी मुस्करा के, गीत गाते हम रहेंगे। मिलन चाहे हो न पाए, मुस्कुराते हम रहेंगे।। धूल में जो मिल भी जाएं, दूर तक हम संग चलेंगे। हो कठिन राहें भले ही,…

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एक शाम मुझे पा लेने दो

प्यार भरी मनुहार भरी, एक शाम मुझे पा लेने दो। गीत लिखे तेरे आँचल पर, उसको तो गा लेने दो। भूलूं ना ये गीत प्रीत का, फिर इसको दोहराने दो। पल दो पल…

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दर्दे दिल की न दवा …

दर्दे दिल की न दवा कोई दवा खाने मे न कोई जाम मयस्सर है मयखाने मे। दिल के बदले जो दर्दे दिल लिया करते है उनको कैसा है शौक खुद को यूँ मिटाने…

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खत्म हुए आज अपने अनुबन्ध ऐसे

खत्म हुए आज अपने अनुबन्ध ऐसे, सागर की लहरों पर गीत लिखे जैसे। कसमों और वादों की राहों पर चल के, नयनो ने छल किया तो आंसू ही छल के। बात रही मन…

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सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसतां हमारा गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा परबत वो…

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मिला

देख तुझको हमें करार मिला आज जीवन कहीं उधार मिला प्यास मिटती गई तभी मेरी प्यार का जब मुझे  खुमार मिला जब मिला तू नहीं कभी उससे रोज तेरा उसे इन्तजार मिला साथ…

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