कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध

नवगीत (कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध) सुन ओ भारतवासी अबोध, कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध? आये दिन करता हड़ताल, ट्रेनें फूँके हो …

देश की स्वतंत्रता का आज ऐसा हाल है

चंद पैसों के लिये ही जिंदगी को मारता
रात दिन करके वो मेनत जीतकर भी हारता