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गीत-ग़ज़ल Archives - Page 3 of 27 - हिन्दी लेखक डॉट कॉम

जिन्दगी

ये किस मोड़ पे जिंदगी ने खड़ा कर दिया बाली उम्र में हमे तज़ुर्बे से बड़ा कर दिया उम्र अठखेलियों की न जाने कब बीत गई नरम हाथों को सलाखों सा कड़ा कर…

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कुदरती रज़ा

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी हैं कैसे कोई बच…

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ग़ज़ल

फ़ोन पर ज़ाहिर फ़साने हो गए ख़त पढ़े कितने ज़माने हो गए ऐब इक पाला फ़क़त हमने मियां चार सू अपने ठिकाने हो गए बेटियां कोठों की ज़ीनत बन गईं किस क़दर ऊँचे…

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मां की ममता . . .

  है स्नेह अगाध से भरा हृदय गजब है सहने की क्षमता एक ओर दुनिया सारी एक ओर मां की ममता है मां दुनिया में परमेश्वर की कृति सबसे प्यारी सब रिश्तों में…

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कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध

नवगीत (कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध) सुन ओ भारतवासी अबोध, कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध? आये दिन करता हड़ताल, ट्रेनें फूँके हो विकराल, धरने दे कर रोके चाल, सड़कों पर लाता भूचाल, करे देश को…

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हिन्दी हमारी जान है

ग़ज़ल (हिन्दी हमारी जान है) बहर 2212  2212 हिन्दी हमारी जान है, ये देश की पहचान है। है मात जिसकी संस्कृत, माँ शारदा का दान है। साखी कबीरा की यही, केशव की न्यारी…

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मैं जब लिखूंगा

✍मैं जब लिखूंगा...✍ मिरी कहानी मिरा किरदार लिखूंगा मैं उजड़े हुए मकां को हवादार लिखूंगा मिरा नसीब हाथों ने छुपा रखा है कहीं जब लिखूंगा इसे चमकदार लिखूंगा वक़्त फिसलता है मिरी मुट्ठी…

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