चिंगारी सुलगाता है…

मुक्तक... चिंगारी सुलगाता है... रौद्र सृजन की वेदी पर तू क्यों श्रृंगार सजाता है सिंह नाद करने के पल मे क्यों लोरिया गाता है ! कवि यदि है तो श्वासों से तू आग…

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दरमयां अपने कुछ रहा भी नही…

गजल... 1112, 112, 1112, 212 112, 112, 21112 212 काफिया... कुछ रहा, कुछ सहा रदीफ... नही बहरा... कामिल अरमान... मुतफाइलुन... दरमयां अपने कुछ रहा भी नही हमने तुमने तो कुछ सहा भी नही!…

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रेत पर लिखने मिटाने से भला क्या होगा…!

गजल रेत पर लिखने मिटाने से भला क्या होगा दाग दामन का छुपाने से भला क्या होगा ! बड़े जोशो खरोश से चला था कारवां एक गिरे थके है आश लगाने से भला…

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मुझसे कुछ रंज हो गया शायद…

गजल... 212, 112, 112 ,212 122, 112,112,212 बहर... मदीद. फाइलातुन, फाइलुन काफिया... हो गया रदीफ... शायद. वो रज़ामंद हो गया शायद वक्ते पाबंद हो गया शायद ! उरूजे तख्त पर कल थी हस्ती…

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मेरे मीत

मेरे मीत रे सुन ले तू दिल की प्रीत निभा दे प्रेम की प्रीत मेरे मीत रे...... बहारे सावन की छाई, बरसे हर अंगना पायल सी छनके बूंदे, छनन छन छन बजे सुरीली…

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नवोदय उदय ये नव है हमारा

#गीत# ——— नवोदय उदय ये नव है हमारा। दिखाया इसी ने मंज़िल-किनारा।। माला-मनकों से रहते थे सारे। भेदों को तोड़े चाहत के मारे। कि यादों बसा है हरपल गुज़ारा। दिखाया इसी ने मंज़िल-किनारा।।…

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चाँद भी फीका लगे

मीटर-212-222-222-212-12 बात मीठी तेरी हँसना खिलता गुलाब है। चाँद भी फीका लगता निखरा यूँ शबाब है।। है घटा सावन की बल खाता ये बदन तेरा। देख नाचे है तुझको बनके मोर मन मेरा।…

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अफसुर्दगी की कहानी।

एक नई गजल :- समन्दर के लबों पर तिष्नगी है। मुझे इस बात की अफसुर्दगी है।। वहाँ अपनी भलाई देख लेते। जहाँ मौजूद तेरी बन्दगी है।। चमक फीकी कभी होती नहीं है। अगर…

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दोस्ती खूब निभाते है हम अजाब से…

गजल... दोस्ती खूब निभाते है हम आजाब से... मुझे पढ लेना तुम मगर जरा हिसाब से पंखुडी उड़ न जाए कोई किताब से! नजर से देखो पर नजर नही लगा देना छुपा के…

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प्रेमचंद ओ प्रेमचंद…

प्रेमचंद ओ प्रेमचंद ओ प्रेमचंद ओ प्रेमचंद... प्रेम चंद सच सच बतलाना 3 दो भाई के बटवारे मे व्यथा द्वंद्व के अंधियारे मे लाभ हानि की अग्नि मे जब सब आपस मे धधक…

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