घर से तुम जब भी निकली

घर से तुम जब भी निकली अपनी नई स्कूटी से, आफिस वाले लेट हुए उस दिन अपनी ड्यूटी से। फोरलेन पे आकर तुमनें, जब एक्सीललेटर तेज किया, जो पैदल थे मरहूम रह गये,…

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आदरणीय मुख्याध्यापिका जी !

आदरणीय मुख्याध्यापिका जी ! सेवा में निवेदन आज पहली बार करूँ देखिये वैसे तो मैं आपसे डरूँ इसीलिए प्रार्थना पत्र द्वारा आपसे इतनी सी विनती करूँ। परमात्मा भी मुझ जैसे बच्चों की सुन…

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पैसों की ना टूटे लड़ी

विधा--पैरोडी शीर्षक--पैसों की ना टूटे लड़ी ............................................ पैसों की ना छूटे लड़ी, दे-दे चंदा घड़ी-दो-घड़ी। छोटे-छोटे जुगाड़ों को छोड़ो, इक लम्बा ही अब हाथ मारो। काले धन की ये फैक्ट्री बड़ी, दे-दे चंदा…

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पंडित जी

भरे बाजार में दुपट्टा उनका सरक गया, बुड्ढों की आहें निकल गई, जवानों का दिल भटक गया। पंडित जी नें कनखियों से देखा, कोई उनको न देख ले, चेहरे पे अंगौछा लपेटा, हुश्न…

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आत्महत्या

प्रसंग है एक नवयुवती छज्जे पर बैठी है, वह उदास है, उसकी मुख मुद्रा देखकर लग रहा है कि जैसे वह छत से कूदकर आत्महत्या करने वाली है। विभिन्न कवियों से अगर इस…

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पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट!

एक दिन दफ्तर से घर आते हुए पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट हो गयी

और जो बीवी से मिलने की जल्दी थी वह ज़रा से लेट हो गयी;

जाते ही बीवी ने आँखे दिखाई -आदतानुसार हम पर चिल्लाई; (more…)

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