रावलपिन्डी

चालीस वर्ष पूर्व मेरे कॉलेज के दिनो में मेरे मित्र ने मुझे अपने परिवार के साथ घटी इस दर्दनाक, अमानवीय पीड़ा से ग्रस्त और व्यथित कर देने वाली कहानी सुनाई थी, इस आग्रह…

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बदनाम भूत बंगले का रहस्य

बदनाम भूत बंगले का रहस्य राकेश अपने बैंक की नई ब्रांच में में ज्वाइन करने के लिए जब माधवपुरा रेलवे स्टेशन पर उतरा तो रात के आठ बज चुके थे, ट्रैन अपने समय से पांच…

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Home delivery (कहानी)

एक महिला ने किराने वाले को फोन लगाया। बड़े विनम्र स्वर में बतलाया - हेल्लो, किराने वाले भैया, मैने सुना है आप, Home Delivery करवा रहे हो। किराने वाला बोला - जी हां,…

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ग़ज़ल

वक़्त का मारा हुआ इंसान पंछियों की तरह फड़फता रहा वक़्त का तकाज़ा है जनाब प्रकृति ने तोड़ दिया इंसानों को! समय के साथ कुदरत का कहर सबने आ गया होश जनाब........... बेसब्र…

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सरस्वती का नाम नंदा क्यों पड़ा ?

बहुत पहले की बात है पृथ्वी पर एक प्रभंजन नाम के महाबली राजा थे। एक दिन वह वन में मृगो का शिकार कर रहे थे। उन्होंने देख एक झाड़ी के पीछे एक हिरणी…

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नया सवेरा होने को है

नया सवेरा होने को है मत घबराना इन काली रातों से चांद को भी निगल लिया है जिसने अब रहा नही कुछ खोने को है डरना नही है फिर भी लेके हिम्मत चलना…

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संकल्प लिया है मैंने

नम्र स्वभाव, अच्छा बर्ताव सदा रखूंगी संजोकर पास दुष्ट से जो पड़े पाला, छीन ले मेरा निवाला दूंगी उसे संत्रास फटके न आसपास संकल्प लिया है मैंने अपनों में मिलके रहना बच्चों से…

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हिम

नभ से गिर रही शीत में हिम रुई के फाहे जैसी। हवा है मानों ठिठक देखती यह अभ्र की माया कैसी।। ऐसा लगता ' ख' में कोई खिली हुई पंखुड़ी कपास है। चिंदी-चिंदी…

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नया वर्ष

नया साल फिर एक नया संघर्ष इस बार ये न जाने क्या ले कर आएगा। खुशियाँ बेहिसाब या दर्द आपार देगा या संतुलित सा जीवन हमे उपहार देगा। जो भी देगा जितना भी…

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एक पल की दुल्हन

उस दिन गाँव में बहुत चहल पहल थी। छोटी सी आदिवासी गाँव। चारों ओर लम्बी लम्बी सखुआ के विशाल पेड़ और महुवा वृक्षों से घिरा प्रकृति की गोद में बसा यह गाँव रसोइया…

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धर्म के वो कातिल थे

अपने वतन को जिसने किया था गुलाम, धर्म के वो कातिल थे। लहर गुलामी की थी चारों तरफ, नहीं साहिल थे। शहीद होकर आजादी को, कर गए हासिल थे। हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, हर मजहब के…

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हेनन और मैं

इस गाँव की कोई यादें नहीं है। यादें नहीं हैं क्योंकि बाशिंदे नहीं हैं। बाशिंदे नहीं हैं, इसीलिये यादें भी नहीं हैं। फ़लसफ़ा नहीं है, मोजज़ा नहीं है, तकल्लुफ़ नहीं है, हया नहीं…

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सुधार गृह

पकड़ो, पकड़ो भागने ना पाये। कि आवाज में सात से उन्नीस साल के बच्चों का समूह तितर-बितर हो गई। सारे झुग्गी के लड़के जुआ खेल रहे थे। पुलिस की गाड़ी और हवलदार की…

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ऐटिट्यूड वाली लड़की

मैं जब कॉलेज से घर के लिए लौट रहा था। साउथ सियालदह का नामखाना के बाद का स्टॉपेज पड़ता है उकिलेरहाट। उकिलेरहाट से मेरे कॉलेज की दूरी तकरीबन ४ किलोमीटर होगी। उकिलेरहाट से…

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एक औरत को आखिर क्या चाहिए

आखिर एक औरत चाहती क्या है, जवाब में एक 10 हज़ार पन्नों की किताब दिखाई जाती है। पर सही जवाब असल में सिर्फ एक पंक्ति का है। आप भी पढ़ें यह छोटी सी…

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