प्यार की हार

घर से निकलने के वक्त पिता से अपने मन की बात बताने की हिम्मत कर,निखिल पिता के कमरे में तो गया। पर,आमना-सामना होते ही सारी हिम्मत खोकर आशीर्वाद लेकर रवाना हो गया

रिकशे वाला

मैडम आपका घर बस स्टाप से इतना करीब है, आप अगर चल कर जाएं तो आपकी सेहत भी ठीक रहेगी और पैसे भी बचेंगे। रोज रोज आने जाने में क्यों पैसे खराब करती हैं?

एहसास अनकहे प्यार का  

“अब हम कभी नहीं मिलेंगे शायद !दो विपरीत दिशाएं कहाँ मिलती हैं बस यह छोटी सी मुलाकात याद रखना”

टिक-टिक-टिक, चटर पटर

आज सूरज कितना निस्तेज हो रहा है, दिन के एक बजे जब उसे अपने परम तापमान पर होना चाहिए, बिंदी जैसा चमक रहा है आसमान के चेहरे पर, और ये दुष्ट कोहरा जैसे सूरज को ज़ंग में हराने को अमादा हो जैसे कह रहा हो -“निकल कर दिखा, देख मैं धुआं धुआं सा कोहरा तेरा तेरा रास्ते रोके खड़ा हुँ|

निश्छल गोविन्द

वो सौतेली माँ के साथ कुए पर गया पर पानी नीचे होने से निकाल नहीं सका तो वो खुद भरने भरने लगी तभी गोविन्द की नजर माँ के चुनरी से चिपके बिच्छू पर गई,
निश्छल गोविन्द ने आव देखा ना ताव ना ही उसका दुर्व्यवहार देखा बस बिच्छू को पकड़ कर फेक दिया जिस दौरान बिच्छू ने उसे डंक मार दिया,

माँ का प्यार

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मांस के टुकड़े !!

तेरा नया यार ही था न, वो !! और बता क्या – क्या करती है, उसके साथ, आज वो साला मुहल्ले के नुक्कड़ तक छोड़ने आया है, कल वो तुझे ताजमहल घुमाने लेकर जायेगा और परसो तुम दोनों किसी मंदिर-वंदिर में शादी करके निकलोगे दिल्ली से, जैसे पहले भाग गयी थी शादी के ठीक तीन दिन बाद!!”

कहानी- कल्याणी

जैसे-तैसे शादी का दिन भी आ गया । एक हफ़्ते से घर में चहल-पहल थी । रेशमा चाची, संतोष ताई जी और बाऊ जी की बहनें रज्जो देवी, शंकुतला देवी भी आ पहुंची । हल्दी रस्म पूरी हुई और शादी से ठीक एक दिन पहले घर में माता रानी का जागरण रखा गया जिसमें अड़ोस-पड़ोस के लोग और दूरदराज के मेहमान, व्यापारी, व्यवसायी, हमारे दोस्त सभी शामिल हुए ।

सच्चा सैल्यूट

“अरे वो पागल है सर कुछ भी बड़बड़ाती रहती है। डेढ़ साल से तो मैं ही देख रहा हूँ और सिपाही तो बताते हैं कि मेरे आने से पहले से है। किसी को उसकी बात भी नहीं समझ आती। शायद बच्चा मर गया करके कुछ कहती रहती है। इसके अलावा कोई शब्द कभी, कोई कभी। पता नहीं चलता कि कौन है, कहाँ की है। बोली से यहाँ की तो लगती नहीं। छोड़ो सर, क्यों टाइम ख़राब करना।”