बिन फूलों के मेले

संभल संभल के चलना फूलों के उपवन में जो कहीं पैर फिसला तो फूल कोमल हैं कुचले जायेंगे इनके कांटें कठोर हैं नुकीले हैं तुम्हें चुभ जायेंगे तुम्हारा बदन छील देंगे तुम्हें लहूलुहान…

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एक दूसरे के पूरक

यह कुआं सूखा है मुंडेर पे इसकी मत बैठना न प्यास बुझेगी न जल में परछाई दिखेगी गर कहीं इसमें अचानक गिर पड़े तो चोट भी अधिक लगेगी हे आसमान में उतरते बादलों…

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मिट्टी

मिट्टी से बर्तन बने मिट्टी से खिलौने मिट्टी से इंसान कुम्हार जो चाक चलाये उससे उपजे सामान भगवान जो चाक चलाये उससे जन्मे इंसान समय का पहिया जो चल जाये उसके नीचे दब…

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