तृप्त

मैंने अपने हाथों में जौ के कुछ दाने भरे उनके छिलके मेरी हथेलियों में चुभ गये एक जौ के दाने ने एक कष्ट के आवरण के भीतर ही कहीं पर खुद को पूर्ण…

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अप्रत्यक्ष रूप से

बाप को मारा मां को एक कोने में डाल दिया एक बहिन को लताड़ा दूसरी को दुत्कार दिया पुचकारता रहा वो तो अपनी अर्धांगिनी को उसके परिवार को अपने परिवार को हमेशा ही…

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छोटी छोटी मानव चेष्टायें

मेरे कानों में मत फुसफुसाओ जो कहना है खुल के शोर मचाकर जोरो से सुनाओ एक मैं ही तुम्हारा करीबी नहीं और भी सब अपने हैं ऐसा करने से आसपास बैठे लोग बहुत…

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टूटने से जब खुद को बचाने लगी

शिर्षक:- टूटने से जब खुद को बचाने लगी टूटने से जब खुद को बचाने लगी, हजार मुश्किलें राहों में आने लगी... कदम जब उठ पड़े खुद को अडिग बनाने को, ये मुश्किलें भी…

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बसंत की आहट

अलौकिक आनंद अनोखी छटा ॥ अब बसंत ऋतू आयी है ॥ कलिया मुस्काती हंसी उड़ाती ॥ पुरवा पंख डोलायी है ॥ महक उड़ी है चहके चिड़िया ॥ भवरे मतवाले मडरा रहे है ॥…

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राष्ट्रहित

अजीब ये इत्तेफाक है बहुतो को ये पता भी नही बयान उनका देश हित में है या देश के खिलाफ है गजब की ये राजनीती है गजब का ये सत्ता मोह है जाने…

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