जब यादों की पोटली खुलती है

जब यादों की पोटली खुलती है पुरानी सारी तस्वीरे पुन: जीवित हो जाती हैं उन की शोखियां-शरारते, आँखो के सामने …

विसर्जन

जगमगाते पंडाल की भीड़ में, शंख-करताल – घड़ियाल के गुंजायमान निनाद के मध्य लुप्तप्राय मैं था विकल -आकुल उत्कंठित तभी सिंदूरी गुबार …

पत्ती-पत्त्नी के लिए, सफलता से जीने के तरीके

छिड्ते रहो, छेड्ते रहो तनाव को दूर भागते रहो सड़ो मत, कुढो मत भीड़ो मत, लड़ो मत प्यार से बोले …