मुक्त नहीं संयुक्त हैँ

एकता अखण्डता के लिए युक्त मुक्त नहीं संयुक्त होना है आवाज दबा के आवाज बुलंद नहीं होगी आवाज दो हम एक है मुक्त नहीं संयुक्त है लेखक / लेखिका : अनिल कुमार सोनी

Continue Reading

मुक्तिमार्गी

युक्त होकर ही मुक्त के मानव की आदत है ये धर्म में भाग लेने की राह सिर्फ धर्म ही बता सकता है. धर्म को मानता कौन है जानता कौन है उत्तर अजीब मिलता…

Continue Reading

नाविक

पतवारों को थाम लो, नाविक, तूफ़ाँ आने वाला है, दिल में हिम्मत बांध लो, नाविक, तूफ़ाँ आने वाला है। मंज़िल सागर पार है बैठी, हम भँवरो में फंसने वाले हैं, लंगर ऊपर बांध…

Continue Reading

चाहत

चाहत में भूले लोग सरलता से जा नहीं पाते रोगी भी है कष्टों का आसानी से मुकाबला कर लेते है शरीर काम नहीं करता अंग सभी शिथिल शरीर चलायमान नहीं है बस शरीर…

Continue Reading

आंखों से आंसू नहीं अब

शहीदों की अंद्रूनी व्यथा पढकर /देखकर/सुनकर आवेश सा आता है आंखों से आंसू नहीं अब रक्त उतर आता है । मैं कच्चे दिल का नहीं कठोर हूँ नाना बन गया हूँ आंखों से…

Continue Reading

अनशन

भूखें रहकर हमने भी संग किया संघर्ष तुम्हारे लाठी के निशान देह पर जनपथ पर पदचिह्न हमारे । काम करो अब नेताजी अपनी गाथा मत गायो कोष तुम्हारा भरा हुआ था खाली खाता…

Continue Reading

उत्तर मांगते शब्द

आज लिखने का समय हैं, मौन हो तुम पीढियां कोसेंगी तुम को ,ये न समझो वेध देंगे शब्द शर शैय्या बनाकर उत्तरायण की प्रतीक्षा में धरा पर पूर्व उसके द्रोपदी सहसा ठठाकर पूछ…

Continue Reading

अँधेरे के बाद

सदियों सदियों हार हार कर लहरों सा सर मार मार कर सत्यवती की तरह समर्पण- करना है तो मत विचार कर झंझावात प्रलय दावानल आँधी या घनघोर घटायें बुझना ही है ,बढ़ना ही…

Continue Reading

नीर नयनों में नहीं लेकिन समुन्दर में उँफा

विकल हो जाती है माँ  देख दुर्दिनता सोच कर हालात कलेजा फट जाता आत्मा चीत्कार कर उठतीं है उसकी नयनों में शब्दों का सागर उमड़ पड़ता      बढ़ता जाता धरा पर अनाचार ,अत्याचार…

Continue Reading

विश्वास

ईश्वर है आस्था है विश्वास है पर कहाँ कब है नहीं पता है ईश्वर है विश्वास है मंदिर में,मस्जिद में काबा,कैलाश में घट घट कुम्भ में ईश्वर है आस्था है तीर्थंकरों ने ढूढा…

Continue Reading

चाह

चाह है आज कुछ लिखूँ तुम पर पर क्या कविता ,छन्द या दोहा कविता से भी सरस तुम मुक्तक से स्वच्छन्द तुम चाह है कुछ लिखूँ तुम मेरे प्रिय हो मुझे बडे अजीज…

Continue Reading

भ्रम का तिलिस्म टूट न जाय

कैसी है मोहब्बत का जादू टौटका सी लगती है आ जाए जब गिरफ्त में तिलिस्म सा लगती है तिलिस्म कैसा अनुपम राह भटका देता है चढ़ सिर पर चैन छीन लेता है इश्क…

Continue Reading

नींद हमारी ख्याव तुम्हारे

अलसाई अलसाई नींद में जब ख्याव तुम्हारा आ जाता है केवल तुम ही तुम होते हो याद तुम्हारी जगा जाता है प्रिय प्रियतम जब साथ तुम मेरे नींद में होते हो मैं सो…

Continue Reading
Close Menu