हिन्दी भाषा

  हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा छायी विश्व पटल पर, जिसकी गरिमा देख विदेशी नतमस्तक हो जाते, उनकी जननी संस्कृत भाषा देव वाणी कहलाये, उनकी उत्तराधिकारी बन हिन्दी करती राज जगत पर।। भक्तकाल का…

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बडा मजा आयेगा,

क्या हुआ जो जन्म में एक साल जुड जायेगा, जन्म-दिवस मनाने में ,पर बडा मजा आयेगा, दोस्त सारे घर आयेंगे, खिलौने खूब लायेंगे, पीं पीं पीं पीं ,पों पों पों पों, सीटी खूब…

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हे मेरे ईश्वर

इतनी कृपा करो हम पर मेरे ईश्वर, कि राह कोई गलत न पकडे मेरे ईश्वर|| तेरे चरणों की धूल से बने है , हे ईश्वर, करे ऐसा करम फिर मिले वो ही जगह मेरे ईश्वर|…

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बहुत मिस कर रही हूँ.

बहुत मिस कर रही हूँ. हर वक़्त तुम्हे याद कर रही हूँ, हाँ मैं तुम्हे बहुत मिस कर रही हूँ, तेरी हर एक बात सोच रही हूँ, जो वक़्त सांथ बिताया महसूस कर…

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ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे

ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे, है जीवन मैं किसी एक शख्स की कमी और उसकी यादों के घूंट पिए जा रहे, अंतर्मन से है बहुत दुखी, पर सब को…

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जगने लगे हैं सपने

वो ही सपने, पलकों तले फिर से लगे हैं जगने........ स्वप्न सदृश्य, पर हकीकत भरे जागृत मेरे सपने, जैसे खोई हुई हो धूप में आकाश के वो सितारे, चंद बादल विलीन होते हुए…

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बात अब इतनी ही होगी

बात अब  इतनी  ही  होगी  तुमसे की  रूह में सुकून और  दिल  में  एहतिराम  रहे बेपरवाह और  बेखौफ रहे निगाहे अब ,बस  दिल  में   जूनून  रहे तेरे चेहरे का नूर,और लबो की मुस्कराहट…

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नारी

नारी स्नेह की धारा है वह, है वात्सल्य की मूर्ति वीरुध वही,वन वही, कालिका की वो पूर्ति राष्ट्र , समाज और परिवार को वो समर्पित स्व - पर, हित को करती प्राण भी…

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वो पाषाण हृदय क्या जाने?

वो पाषाण हृदय क्या जाने? हृदय है तो, पीड़ा भी होगी! व्यथा होती है सागर सी गहरी, पीड़ा होती है कितनी असह्य, टूटते हैं तार कितने ही जीवन के, आशाओं की, उम्मीदों की,…

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साथ साथी नहीं छोड़ना

बंधनों को नहीं तोड़ना । साथ साथी नहीं छोड़ना ।। प्रेम धागे नहीं तोड़ना । साथ साथी नहीं छोड़ना ।। प्रीत धारा नहीं मोड़ना । साथ साथी नहीं छोड़ना ।। पुष्प माला नहीं…

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तस्वीर

एक तस्वीर । हर लेती पीर ।। एक है नन्हा बच्चा । भोला भाला सच्चा ।। पहने है कपड़े फटे । बाल न कबसे कटे ।। बीन रहा वो कबाड़ । अंबर की…

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मैं एक अनछुआ शब्द

मैं अनछुआ शब्द हूँ एक! किताबों में बन्द पड़ा सदियों से, पलटे नही गए हैं पन्ने जिस किताब के, कितने ही बातें अंकुरित इस एक शब्द में, एहसास पढ़े नही गए अब तक…

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बुंद समुन्द 

अपने घर में हूँ मैं  । झाँकता रहा ताउम्र उस खिड़की से । सारा जहान दिखता है जहाँ से बहुत कोशिश कर देखा भी मगर घर कहीं दिखा नहीं ....... ****** किराये के…

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इंसान

इसानियत है मर चुकी इंसान कहाँ है भारत की पहले जैसी पहचान कहाँ है । अपने ही बुजुर्गो को कर रहे है दर- बदर श्रवण कुमार जैसी वो संतान कहाँ है । सीमा…

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बैरिन भई रातें

बिन पिया बैरिन भई सब रातें किसे बुलाऊँ सौतन भई सब बातें हेर - हेर देखत कब आये प्राण प्यारा बिन उसके हाड़ माँस सूख भए खाँचे पिया गया परदेश न भेद काहूँ…

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