राखी

भैया कृष्ण ! भेजती हूँ मैं राखी अपनी, यह लो आज । कई बार जिसको भेजा है सजा-सजाकर नूतन साज ।। लो आओ, भुजदण्ड उठाओ इस राखी में बँध जाओ । भरत -…

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ध्वनि

अभी न होगा मेरा अंत अभी-अभी ही तो आया है मेरे वन में मृदुल वसंत- अभी न होगा मेरा अंत। हरे-हरे ये पात, डालियाँ, कलियाँ, कोमल गात। मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर फेरूँ गा…

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तोड़ती पत्थर

वह तोड़ती पत्‍थर; देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर- वह तोड़ती पत्‍थर। कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्‍वीकार; श्‍याम तन, भर बँधा यौवन, नत नयन प्रिय, कर्म-रत मन,…

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अग्निपथ

वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी,…

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चल तू अकेला!

तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो तू चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला, चल तू अकेला! तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो चल तू अकेला, जब सबके मुंह पे पाश.. ओरे…

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बसंती हवा

हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा हूँ। सुनो बात मेरी - अनोखी हवा हूँ। बड़ी बावली हूँ, बड़ी मस्त्मौला। नहीं कुछ फिकर है, बड़ी ही निडर हूँ। जिधर चाहती हूँ, उधर घूमती हूँ,…

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मन समर्पित तन समर्पित

मन समर्पित तन समर्पित मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित चाहता हूँ मातृ-भू तुझको अभी कुछ और भी दूँ ॥   माँ तुम्हारा ऋण बहुत है मैं अकिंचन किन्तु इतना कर…

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माँ, कह एक कहानी

'माँ, कह एक कहानी!' 'बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?'   'कहती है मुझसे यह बेटी तू मेरी नानी की बेटी! कह माँ, कह, लेटी ही लेटी राजा था या रानी?…

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मातृभाषा का प्रेम

मातृ-भाषा के प्रति निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।। अंग्रेज़ी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन। पै निज भाषाज्ञान बिन, रहत…

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यह कदम्ब का पेड़

यह कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे
मै भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे
ले देती यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली
किसी तरह नीची हो जाती यह कदम्ब की डाली (more…)

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