हम गुम हो रहे हैं धीरे धीरे

हम गुम हो रहे हैं धीरे धीरे रोज मर रहे हैं धीरे धीरे दांत गिरे, बाल झड़े, आँखो पर चश्मे चढ़े नहीं हो पाते सीधे खड़े, दिल जंवा पर अंदर छल्ले डले खुशिओं…

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शोखिया, नादानियाँ करती हसीनाएँ

कान पकड़ कर माफी माँगना ऊपर से हँसना हसिनाओ की आद्त हैं वो ऐसी ही शोखिया-खुशिया बिखेरते रहते हैं उन्हे ग़लतियाँ करने में मज़ा आता हैं हमे माफ़ करने में सुकून आता हैं…

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छोटी-छोटी खुशियो को खुल के ज़ीएँगे…..

भूल गया राग-रंग, भूल गया मस्ती तीन चीज़ याद रही, बीवी, बच्चे और ग्रहस्ती ग्रहस्ती के चच्कर में ऐसे पड़े सब कुछ होते हुए भी, अकेले खड़े पता न चला जवानी कब आई…

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तेरी गुस्ताख निगाहों की कसम

तेरी गुस्ताख निगाहों की कसम पहली नज़र में मर गया सनम कवच में दिल रखते थे संभाल के फिर भी घायल कर दिया तेरे नयनो के बाण ने हम भी पलकें बिछाए बैठे…

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तमन्ना तो तुझे पाने की थी, पर दूर हो गये…

तमन्ना तो तुझे पाने की थी, पर दूर हो गये इसी बहाने दुनिया से तो रूबरू हो गये सोने की दीवार हम से फांदी न गई जात-पात की खाई पाटी न गई मर्यादा…

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किसी के आश्वासन पर पूरा भरोसा मत कर दोस्त

वो जो मद्द के आश्वासन बाँटते फिरते थे उन्हे दीवालिया होते देखा हैं वो मजबूत दीवार जो सहारे दे सकती थी उन्हे हवा से गिरते देखा हैं किसी के आश्वासन पर पूरा भरोसा…

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तन्हाई का गम अब सहा जाता नही

तन्हाई का गम अब सहा जाता नही दिन तो कट जाता है, राते कटती नही तुम्हें सपनो में दिखने से दिल भरता नही तेरी तस्वीर को देखने से भी दिल बहलता नही खुद…

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जब यादों की पोटली खुलती है

जब यादों की पोटली खुलती है पुरानी सारी तस्वीरे पुन: जीवित हो जाती हैं उन की शोखियां-शरारते, आँखो के सामने आ जाती हैं हवा और फ़िज़ा में उमंग छा जाती हैं अपनी की…

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मैं लिखने बैठा जिंदगी की बही

क्या खोया - क्या पाया, क्या ग़लत - क्या सही मैं लिखने बैठा जिंदगी की बही कुछ खोया, कुछ पाया पर कभी किसी का दिल न दुखाया कभी लाभ, कभी हानि कभी दिमाग़…

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