जिंदगी के पल

जिंदगी के पल सभी बचपन के पल बनें। हर पल अगर गुलाबी लाल मखमल बनें।। दिल से दिल का राब्ता इतना सरल बनें। जो बनते बनते रह गयीं वो बातें कल बनें।। कुछ…

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मेरे घर तुम जो ‍आओ

मेरे घर तुम जो ‍आओ तो ये एहतमाम हो जाये। मेरा ये गरीबखाना भी दारुल सलाम हो जाये।। ज़रूरी है अग़र पर्दा तो पर्दा हो लतीफ़ इतना। तुम्हारी हो न रुसवाई, मेरा भी…

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संदेश-मधुमोती से

"स्व॰डाँ हरिवंश राय बच्चन को समर्पित स्व-रचित मुक्तक महाकाव्य मधुमोती से" "संदेश" १९.०३.२००३ "दानशीलता ने बादल को नील गगन में उठा दिया, संग्रहणीयता ने समुद्र को अतल धरा में धँसा दिया, किन्तु नियति…

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एक हकीकत

शाख़ से टूटकर पत्ते, हमेशा ज़ार-ज़ार हो जाते हैं ; ख़टास पड़ जाये, तो रिश्ते तार-तार हो जाते हैं ! चोट जिसने ख़ाई है उसको पूछ कर तो देखो ; कैसे अपनों के…

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नज़रिया

कितनी अकेली, कितनी तनहा सी है जिंदगी; टूटे ख्वाब, दुखों की सहेली सी है जिंदगी ! बोझिल सांसे, एक पहेली सी है जिंदगी; सिसकता जख्म़, बड़ी जहरीली सी है जिंदगी ! थोड़ी गमगीन,…

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प्रेम कहानी

मैं शब्दों का जमींदार तुम ख़ामोशी की अवतार कैसे होगा मिल प्रिये तुम रजक मैं कुम्भकार !! चाह उधर भी है चाह इधर भी है चलो भाग चलते हैं राह जिधर भी है…

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आख़िर क्यूँ

प्यार इबादत है तो टकराव क्यूँ प्यार मिलन है तो अलगाव क्यूँ प्यार इक दिवा-स्वपन है क्या प्यार अहसास है तो बिखराव क्यूँ !! इश्क़ नशा है तो मज़ा क्यूँ इश्क़ अता है…

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भगवान से गुफ्त़गू

जमीं पर नहीं बचा आशियाना चलो आसमान बाँट लेते हैं ! अपनी जरूरतों के हिसाब से थोड़े प्लॉट काट लेते हैं !! फ़िर रोज़ मुलाकातें होंगी भगवान से हम भी जिया करेंगे शान…

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फ़ेहरिस्त

मोड़-दर-मोड़ वो याद आते रहे मोड़-दर-मोड़ हम चलते रहे ! सफ़र लंबा था, तन्हा थे हम यादों के जुगनू संग टिमटिमाते रहे !! बस कदम बढ़ रहे थे, संग यादों के काफ़िले चल…

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जिन्दगी

ठहरी हुई हुं, सिमटी हुई हुं, ख्वाबों की अपनी सी इक दुनिया मे खोयी हुई हुं, जिन्दगी के मोतियों को खुद मे अपनी मुस्कान से पिरो रही हुं, हाल-ए-दिल कैसे करें बयां मुस्कान…

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वीरता

मैं युद्धमंत्र , रणभूमि हूँ , मैं पुण्यफलन संघर्षों की , देखो पन्नों को पलट आज साक्षी हूँ कितने वर्षों की , जब-जब प्रत्यंचा चढ़ी कहीं तुमने मेरी टंकार सुनी , जब शंखनाद…

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सूखा पेढ़

सूखे हुए पेढ़ की अधटूटी टहनी पर आपस में लिपटे ख्वाबो में डूबे बैठे हैं कौन वो,? ,वो जिन्हें पता नहीं ख्वाबो से दूर कही वास्तविकता के स्तर पर सूखे हुए पेढ़ की…

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