आख़िर क्यूँ

प्यार इबादत है तो टकराव क्यूँ प्यार मिलन है तो अलगाव क्यूँ प्यार इक दिवा-स्वपन है क्या प्यार अहसास है तो बिखराव क्यूँ !! इश्क़ नशा है तो मज़ा क्यूँ इश्क़ अता है…

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भगवान से गुफ्त़गू

जमीं पर नहीं बचा आशियाना चलो आसमान बाँट लेते हैं ! अपनी जरूरतों के हिसाब से थोड़े प्लॉट काट लेते हैं !! फ़िर रोज़ मुलाकातें होंगी भगवान से हम भी जिया करेंगे शान…

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फ़ेहरिस्त

मोड़-दर-मोड़ वो याद आते रहे मोड़-दर-मोड़ हम चलते रहे ! सफ़र लंबा था, तन्हा थे हम यादों के जुगनू संग टिमटिमाते रहे !! बस कदम बढ़ रहे थे, संग यादों के काफ़िले चल…

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जिन्दगी

ठहरी हुई हुं, सिमटी हुई हुं, ख्वाबों की अपनी सी इक दुनिया मे खोयी हुई हुं, जिन्दगी के मोतियों को खुद मे अपनी मुस्कान से पिरो रही हुं, हाल-ए-दिल कैसे करें बयां मुस्कान…

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वीरता

मैं युद्धमंत्र , रणभूमि हूँ , मैं पुण्यफलन संघर्षों की , देखो पन्नों को पलट आज साक्षी हूँ कितने वर्षों की , जब-जब प्रत्यंचा चढ़ी कहीं तुमने मेरी टंकार सुनी , जब शंखनाद…

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सूखा पेढ़

सूखे हुए पेढ़ की अधटूटी टहनी पर आपस में लिपटे ख्वाबो में डूबे बैठे हैं कौन वो,? ,वो जिन्हें पता नहीं ख्वाबो से दूर कही वास्तविकता के स्तर पर सूखे हुए पेढ़ की…

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और भी दूँ

मन समर्पित , तन समर्पित , और यह जीवन समर्पित । चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ । माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, अकिंचन किन्तु इतना कर रहा, फिर…

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पुष्प की व्यथा

मैं किसी वट-वृक्ष में जन्मा फूल नहीं हूँ, मैं ज़मीं में स्वयं ही जन्मा सुमन हूँ, पुष्प हूँ, जिस पर कवियों ने कवितायेँ लिखीं, लेखकों ने निबंधों में सहेजा, भक्त ने भगवान के…

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कोशिश

मंजिल न पा सके तो क्या, चार कदम चलना तो सीखो। आकाश न छू सके तो क्या, पंछी की तरह उड़ना तो सीखो। क्या तुम हो उस शिशु से बदत्तर, पहुँचे मंजिल तक…

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पेड़ लगाओ

पेड़ लगाओ , पेड़ लगाओ , इस दुनिया को बचाओ। क्या करते हो पेड़ काटकर , जानवरों का कर रहे हो नुकसान। पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ, दुनिया को प्रदूषण से बचाओ। इससे होता…

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बोतल में

बोतल में पानी भरे घूम रहा इंसान ढूंढता दारु की दुकान पूछता राहगीर को सांसे थाम मुखड़ा घुमाकर होता पागल ! पैर कमजोर लड़खड़ाते फूल जाती सांसें बिगड़ती तबियत आँखे होती उदास काश…

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याद आता वो मेरा गाँव…

मिट्टी में धंसते ये पाँव,याद आता वो मेरा गाँव। खेतों में फसलें लहरातीं,थी किसान का मन बहलाती,गेहूँ की थी जो ये बालियाँ,जैसे पनहारिन की गगरियाँ। ओस से गीले मेरे पाँव,याद आता वो मेरा…

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स्वर्ग…. मेरी माँ की कोख में….!!

जन्मदिन पर माँ को समर्पित एक रचना - <><><><><><><><><><><><><> स्वर्ग.... मेरी माँ की कोख में....   काल चक्र का पहियाँ घुमा.. समय ने अपनी चाल बदली लेकिन अबसे बहुत पहले मेरी माँ की....कोख…

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