किसी के आश्वासन पर पूरा भरोसा मत कर दोस्त

वो जो मद्द के आश्वासन बाँटते फिरते थे उन्हे दीवालिया होते देखा हैं वो मजबूत दीवार जो सहारे दे सकती थी उन्हे हवा से गिरते देखा हैं किसी के आश्वासन पर पूरा भरोसा…

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तन्हाई का गम अब सहा जाता नही

तन्हाई का गम अब सहा जाता नही दिन तो कट जाता है, राते कटती नही तुम्हें सपनो में दिखने से दिल भरता नही तेरी तस्वीर को देखने से भी दिल बहलता नही खुद…

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जब यादों की पोटली खुलती है

जब यादों की पोटली खुलती है पुरानी सारी तस्वीरे पुन: जीवित हो जाती हैं उन की शोखियां-शरारते, आँखो के सामने आ जाती हैं हवा और फ़िज़ा में उमंग छा जाती हैं अपनी की…

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मैं लिखने बैठा जिंदगी की बही

क्या खोया - क्या पाया, क्या ग़लत - क्या सही मैं लिखने बैठा जिंदगी की बही कुछ खोया, कुछ पाया पर कभी किसी का दिल न दुखाया कभी लाभ, कभी हानि कभी दिमाग़…

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विसर्जन

जगमगाते पंडाल की भीड़ में, शंख-करताल - घड़ियाल के गुंजायमान निनाद के मध्य लुप्तप्राय मैं था विकल -आकुल उत्कंठित तभी सिंदूरी गुबार से बाहर आती विसर्जन को जाती मूरत की आँखों में ... अंततः ढूंढ़ ही लिया…

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हमें तो उन को है मनाना

रूठना उन का, पर हमें तो उन को है मानना अपना प्यार खुल के जताना मजा लो, कर के उनकी जी हजुरी परवाह नहीं चाहे झलके तुम्हारी मजबूरी जी भर के मूरखता बेवकूफियां…

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पत्ती-पत्त्नी के लिए, सफलता से जीने के तरीके

छिड्ते रहो, छेड्ते रहो तनाव को दूर भागते रहो सड़ो मत, कुढो मत भीड़ो मत, लड़ो मत प्यार से बोले बहस से तौबा कर लो अंदर ही अंदर रो लो बस मुँह मत…

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गुड्डे गुड़िया का खेल

बचपन के प्यार को गुड्डे गुड़िया का खेल कह कर जिंदगी के दाव खेलने, जवानी के पंख लगा कर वो हमारी जिंदगी से रूकसत हो गए अंजान दुनिया में उड़ गए ह़म जख्मो…

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बुरी लगती है

कागजी नावों पर बरसात बुरी लगती है जहर तो जहर है फरियाद बुरी लगती है कब्र के ऊपर ये जो घास अभी उग आयी बीज देने वाले की याद बुरी लगती है नूर…

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