सूरज का प्रभामंडल

सूरज के प्रभामंडल के बन रहे न जाने कितने अनगिनत प्रतिबिम्ब उसकी जल में पड़ती परछाइयां बना रही प्रकाश की मछलियों के तैरते पदचिन्ह सूरज जो डूब जाये जल की तरंगों में जो…

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सीप में मोती

सीप में मोती आसमान में चांद कितना अपना कितने करीब फिर भी हो जाता वक्त के प्रवाह में खुद से दूर आंखों से ओझल छीन लेती दुनिया हो जाता पराया कभी एक झलक…

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जिंदगी

जिंदगी में कभी ऐसा समय आए राह-ए-मंजिल तुम्हें नजर ना आए,लाख कोशिशें करने के बाद भी सफलता तुम्हें मिल ना पाए,तो हार मत मानना अगर जिंदगी की जीत में यकीन है तो कोशिश…

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गायिका

करू क्या बड़प्पन ॥ सुहाना हो लिखते ॥ तुम्हारी गजल को ॥ खुद गा रही हूँ ॥ शब्दो की परिभाषा ॥ भाने लगी है ॥ सुरीले स्वरो में ॥ गुन-गुना रही हूँ ॥…

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बदलते रंग

रंग ही रंग बिखरे हुए मेरे चारों तरफ कैसे पहचानूं अपनों के चेहरों के पल पल बदलते रंग कैसे पाऊं उनका संग जो मेरे तन का रंग छुड़ाकर जा रहे दूर मुझसे जीवन…

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मां की ममता

मां की ममता का कोई मोल नहीं अनमोल है यह इसका कोई ओर छोर नहीं एक जमीं से उपजता प्यार, एक आसमान से छलकता प्रभु का दिया उपहार है यह अपने बच्चों के…

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महिला दिवस

नारी सशक्तिकरण पर भाषण देने वालों , ज़रा इन सवालों के जवाब तो दो । उच्च वर्ग की महिलाओं को छोड़कर , नामी फिल्म अभिनेत्रियों को छोड़कर , टाटा ,बिरला और अंबानी सरीखी…

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सब के बश की बात नहीं

हर कोई को गीत गा नहीं सकता।। हर कोई तान बजा नहीं सकता।। हर कोई साज सजा नहीं सकता।। हर कोई प्रीति निभा नहीं सकता।। हर कोई इंसान हैवान नहीं बनता।। हर कोई…

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