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कविता Archives - Page 2 of 157 - हिन्दी लेखक डॉट कॉम

मुझे न आया

चेहरा ढक लिया हाथों से माथा दबा दिया अंगुलियों की पोरों से पलकें भींच ली आंसू रोक आंखों में सांसे सहम गई घुटती धड़कनों के तंग गलियारे में परेशान हूं मैं समय की…

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एक हाथ

कांच की प्याली में उतर आया है आसमान का नीला रंग आसमान की इसमें परछाई भी है और रुसवाई भी है आसमान की एक गाढ़े नीले रंग की मुंडेर भी है एक हाथ…

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अहसास

सुबह सुबह नंगे पांव समुंदर किनारे सैर यह रेत के गीलेपन को छूने का अहसास कुछ अलग था यह मेरी खुशनुमा भीगी पलकों में कैद यादों के अहसास जैसा था किसी को खोना…

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हर घर दीवाली

मिट्टी के दीपक में तेल में भीगी रुई की बाती से प्रकाश की एक लौ जले प्रेम के स्पर्श की परछाई जो उसपे पड़े तो उसका रोम रोम कुछ और जले फूल के…

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सारे जहाँ की खुशियाँ तेरे भी घर को आये

तू जगमगाये तेरा दीप जगमगाये || सारे जहाँ की खुशियाँ तेरे भी घर को आये || गंगा और यमुना सा निर्मल हो तेरा मन || अम्बर और धरा सा स्वच्छ हो तेरा तन…

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हिंदी

हां हिंदी  बोलती हूं मैं, हां हिंदी सीखती हूं मैं, मेरे रग-रग में शामिल है,हां हिंदी जानती हूं मैं। मेरी पहचान हिंदी है, मेरी अरमान हिंदी है, मुझे प्यारी मेरी हिंदी, हां हिंदी…

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जिन्दगी का सफर

वक्त सिहर गया जिन्दगी का सफर एक पड़ाव पे जो ठहर गया न कोई गिले शिकवे न रोना मुस्कुराना आदमी चला गया जो इस संसार में पीछे छूटा वो सब सहम गया अपनों…

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उपहार

हे भगवन धन्यवाद जो मुझे एक भाई दिया नूर बिखेरता फरिश्ता दिया खेलने को खिलौना दिया सपने का उड़न खटोला दिया खुशियों का बिछौना दिया आशाओं का पलना दिया किलकारी मारता शोर मचाता…

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हमारी दोस्ती

बीज से दरख्त बन गई हमारी दोस्ती जमीं पे सूरज तो कभी चाँद बन चमक गई हमारी दोस्ती गले में जो पड़े बाहों के हार तन की राह मन से मिलने चली हमारी…

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अर्पित

आज मैं खुश हूं बहुत खुश हूं दर्पण भी सहमत बहुत खुश हूं रोई नहीं पिछली कई रातों से सोई नहीं ख्वाबों की बरसातों में लबों पे मुस्कान की कली खिली है धूप…

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मरघट

एक मरघट हैं मेरे अंदर, जहां चिता जलती रहती हैं, मेरे कुछ स्वपनों की, कुछ स्मृतियों की, कुछ विशेष रिश्तों को बांधे रखनें वाली उन कच्ची डोरियों की, और यह निरंतर जलती रहती…

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मेरे प्रेम गीत

रात ढलती रही , शम्मा जलती रही तुम गुनगुनाते रहे , हम मुस्कुराते रहे चाँद ने पहरा, हम पर बराबर दिया जुगनुओं ने आँचल को, रोशन किया घड़ी वक्त की , टिकटिकाती रही…

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