हिमाचल का गौरव

समाधिस्थ यति के सदृश हिम प्रान्त के शिखर यहां छ्ल-छ्ल करती सरिताएं काल चक्र पहिये से यहां ऋगवेद की सृजन धरा यही आकाश गंगा सी पावन नीर शिखर पर खगोल सी सुमता ऋषियो…

Continue Reading

गाँव और शहर

हद है हर शहरी गाँव को कोसे, उसे कहाँ पता शहर की जननी गाँव ही तो है। और जहाँ बसे भारत माँ वो गांव ही तो है जहाँ मिले संस्कृति, सभ्यता भाईचारा का…

Continue Reading

युग पुरुष

बलशाली का शौर्य कहो, क्या छिपता है? उसके स्वेद-बिन्दु से ही, प्रस्तर भी पिघलता है। जिसमें अग्नि सा तेज न हो, वह सूर्य कहां कहलाता है। जिसमें ध्वनि की कोई गूंज न हो,…

Continue Reading

नव वर्ष

नव वर्ष मंगलमय हो! न निराशा ना भय हो, हर चेहरे पर मुस्कान रहे, ज्ञान का सूर्य उदय हो। सबका एक सवेरा हो, ना कोई मेरा-तेरा हो, इक दूजे का साथ मिले, भारत…

Continue Reading

बदल गए हो दोस्त

सांचे में दुनियादारी के ढ़ल गए हो दोस्त ऐसा लग रहा है कि बदल गए हो दोस्त तुम्हारे हर कदम को सराहा सदा मैंने मेरे कदमों से भला क्यों जल गए हो दोस्त…

Continue Reading

अकेलापन भाने लगा

जो नम आँखो को न पढ़ सके वो दिल क्या खाक पढेंगे जहाँ भी कदम रखेंगे वहाँ राख कर देंगे। तोहमत का सिलसिला बढाकर खुद बैठ गया मुँह छिपाकर सामने आने से झिझककर…

Continue Reading

बुलबुल

चौबारों में चहकी चिड़िया देखी है। लुटती बुलबुल बीच बजरिया देखी है।। खूनी दरिंदों का ऐसा कोहराम हुआ। घायल गुड़िया पे घात बेरहम हुआ। काची काया पे चिंगरिया देखी है। लुटती बुलबुल बीच…

Continue Reading

तन्हा सफर

ताउम्र ऐसे सफ़र में रहा तन्हाईयों के असर में रहा बिखरने का डर नहीं था मुझे हवाओं के ऐसे ही घर में रहा सब अंजान चेहरों की भीड़ में फकत एक चेहरा नजर…

Continue Reading

इल्तिजा

बात लाजमी ही थी यूँ सब सरेआम न कर हाँ भूल जाऊँगा तुम्हे, पर बदनाम तो न कर यूँ किस्से पुराने सुनाकर सफाई देने का बहाना न कर मत कर मेरी इज्जत पर…

Continue Reading

मैं ठीक हूं ईश्वर

मैं ठीक हूं ईश्वर! तुम कैसे हो? तुम्हारे लिए ही रोज-रोज इस धरा पर लड़ाइयां होती हैं खोजे जाते हो तुम मंदिरों और मस्जिदों में कहां है तुम्हारा सृजन स्थल या कि जन्म…

Continue Reading

एक बेरोजगार का चाँद

चाँद तू रात का मुसाफिर तेरी मेरी क्या दोस्ती तू अंधेरों का साथी मुझे तो चाहिये रौशनी।। क्या तूने कभी सोचा मेरे लम्हे दर लम्हे कैसे बीते हैं रौशनी की किरन किरन को…

Continue Reading

नववर्ष 2020

ओ नववर्ष अपने संग क्या लाए हो इस वर्ष। सुख शांति अमन चैन का पैगाम प्रगति पथ पर बढ़े इंसान। ना हो किसी के दिन में रैन बाहर रहने वाले बच्चों के माता-पिता…

Continue Reading

नववर्ष-एक नयी किरण

कुछ ख्वाब अधूरे है अब भी, ख़्वाहिशे हैं दिल में दबी हुई। हसरतें मुकम्मल हो सबकी, नववर्ष की फिर दस्तक हुई।। मंहगाई छोड़ गगन की राह, इस बार धरातल पर उतरे। अधूरी ना…

Continue Reading

हो चुकीं हैं आवाजें आजाद

वह आ रहा है सबके बीच महसूस हो गया माहौल के मिजाज़ से लोगों के चेहरों पे बदलने लगे हैं रंग बढ़ रही है छटपटाहट कंपकंपा रहीं हैं आवाजें थरथरा रहा है शोर…

Continue Reading

मैंने देखा है भगवान को

मैंने देखा है सरहद पर लड़ते लाखों जिंदगियों को बचाते हुए एक इंसान को। हाँ, मैंने देखा है भगवान को। रोली, चावल, पान, कुमकुम, अगरबत्ती से लोग करते हैं प्रसन्न अपने भगवान को।…

Continue Reading
Close Menu