आशा की भोर

एक आशा की भोर एक अभिलाषा आसमां छूती एक उम्मीद जमीं के पैर चूमती मंजिल के निशां यहीं तलाशने हैं इन सांस लेती वादियों में जीवन के पल यहीं ढूंढने हैं इन मिट्टी…

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बेवफा

कभी मटकी है कभी भटकी है || कभी बात बात पर चटकी || बहुतो की खतनाक प्रेमिका || प्रेम डाल पर अटकी है || ब्वॉय फ्रेन्ड कइयों को रखती || गिन कर देखो…

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सैनिक अर्धांगनी

सैनिक अर्धांगनी सज सँवर बोली में बैठ, आई सैनिक की अर्धांगनी, देखकर जज्बा पति का ,पुलकित हुई वह कामिनी। क्या भाग्य मेरा है जगा,वह मन ही मन में सोचती, पर क्षणिक आशंका वहीं,…

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जीवन की बगिया

मैं पेंटिंग में रंग नहीं एक तस्वीर में सांसें भर रही हूं काश यह जी उठे और बन जाये मेरी दोस्त मेरी दुआ कबूल हो जल्दी जल्दी आहिस्ता आहिस्ता यह सोच मैं ठंडी…

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खंडहर

खंडहर खाली हैं वीरान हैं पर मिट्टी में मिलने से अभी भी डरते हैं रेत में उगे नागफनी के पौधों से यह फख्र से सिर उठाकर अपने होने का अपने वजूद का अब…

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रहमोकरम

देखो यह प्रकृति का नजारा है एक पेंटिंग सा श्वेत श्याम पलकों की चिलमन पे एक दृश्य उभरता रंगीन सपने सा आग लगी है आसमान में सूरज भी खुद को बचाता डूब रहा…

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अनुमान

गगनचुम्बी इमारतें पर गगन को छूती हैं क्या बीच बस्ती बहते दरिया एक दूसरे के किनारों को छूते हैं क्या यह आकाश कितना विशाल है पर इसे अपने इस गुण का आभास है…

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जीवन का सामान

यह सफर है नीले पानियों का सिर पे है धूप साया है संग लहराती चुनर धानियों का यह पल है मस्ती का जहाँ से चले घूमफिर के वहीं लौटकर आने का मुसाफिर मैं…

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महगाई फिर नृत्य करेगी

महगाई फिर नृत्य करेगी || बढ़ जायेगे भाड़े || अर्थ व्यवस्था खण्डित होगी || खाने के पड़ेगे लाले || अफसर नेता मौज करेंगे || लेंगे नफा व्यापारी || फिर किसान गरीब के बर्तन…

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सपनों की रानी

फूल सा तेरा चेहरा गीत क्या लिखूं तेरे रूप पे सौंदर्य की देवी तू श्रृंगार रस की कविता मादक इतनी जैसे शराब हो पावन इतनी जैसे जलता चिराग हो मुस्कुराती जो खिलकर ओस…

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सुमिरन

भाग दौड़ चल लपक चाँद को लेकर जा रही कहाँ लहर डूबती सांझ को नैय्या तैर रही डूबने का भी तो डर है लगी न जो किनारे बीच भंवर फंस जाने का भी…

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स्वाद

स्वाद का भी एक अनोखा संसार होता है यह फल मीठा है या खट्टा यह वस्तु कसैली है या विषैली यह खाने योग्य है या फेंकने लायक यह मसाला तीखा है या फीका…

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एकरूपी जीवन दर्शन

कुदरत की रोशनी तुम्हारी रूह को छूती है मुझे नहीं देखो कुछ भी करो यह भेदभाव मत करो कायनात के सारे रंग तुमने बटोर लिए सारी रोशनी तुमने चुरा ली सारे आसमां के…

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आत्मसम्मोहन

तितली सी पंख फैलाये उड़ रही बादलों के द्वार यह आत्मसम्मोहन ले जायेगा मुझे आकांक्षाओं के लहराते बवंडरों के पार मन में झिलमिलाती एक उम्मीद की किरण रख जमीं पे भी उतरूंगी कलियों…

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