राष्ट्रहित

अजीब ये इत्तेफाक है बहुतो को ये पता भी नही बयान उनका देश हित में है या देश के खिलाफ है गजब की ये राजनीती है गजब का ये सत्ता मोह है जाने…

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यह सेतु है

नदियों के दो किनारों को जोड़ता है सागर के दो छोर पे होकर गुजरता है जमीं और आसमां के तार को जोड़ता है जीवन की बहती धार को जोड़ता है यह सेतु है…

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नदिया के उस पार

चेहरे पे मुस्कान खिली शहर से जो मेरी बैलगाड़ी गांव चली मिट्टी की पगडंडी है कच्चे हैं रास्ते खेतों में लहलहा रही फसल आसमां के नीचे बादल बादलों के नीचे बसे हरियाली है…

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मन की आवाज

यह शोर नहीं मेरे मन की आवाज है सुन सको तो सुन लो इसे इसे मैं तुम्हारे कानों तक कैसे पहुंचाऊं कि हवा न भी चले तब भी तुम्हें पेड़ पे लटके एक…

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हमारी तरह

उनका हुआ महफिल में आगाज़ बदलने लगे हर चेहरे के अन्दाज़ हर पल इन बदलते रंगों के पीछे जैसे छिपा हो राज़ हमारी तरह नैनों ने नैनों से बातें की खामोशी ने तमाम…

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